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रेरा पोर्टल से जुड़ेगी मानचित्र स्वीकृति, अवैध निर्माण पर कड़ी निगरानी—आवास विभाग के बड़े फैसले

 

 

 

देहरादून: राज्य में निर्माण गतिविधियों को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में सचिवालय में अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं की मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा।

इस व्यवस्था के तहत सभी मानचित्र स्वीकृति प्राधिकरणों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेगी। बैठक में रेरा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और निर्माण स्वीकृति की जटिलताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर राहत के संकेत

बैठक में 1 अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत बढ़ाए गए भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर भी मंथन हुआ। अधिकारियों ने बताया कि बढ़ी दरों के कारण आम लोगों को मानचित्र पास कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर आवास सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे अपने बोर्ड की बैठकों में इस विषय पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजें, ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।

पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार समाप्त

एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि अब अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाएं नक्शा पास नहीं कर सकेंगी। संशोधित अधिनियम के तहत यह अधिकार केवल विकास प्राधिकरणों को दिया गया है।

आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में सभी जिला पंचायतों को तत्काल सर्कुलर जारी कर नई व्यवस्था से अवगत कराया जाए।

कॉलोनियों पर रेरा की सख्त निगरानी

बैठक में यह भी तय किया गया कि अधिसूचित क्षेत्रों के बाहर भी यदि कहीं भूखंडों का उपविभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो वहां उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण के माध्यम से कड़ी निगरानी और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लग सके।

अवैध निर्माण रोकने के लिए बनेगा कॉमन ड्राफ्ट

राज्य में बढ़ते अवैध निर्माण पर चिंता जताते हुए आवास सचिव ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए। यह ड्राफ्ट सभी प्राधिकरणों के लिए समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराएगा, जिससे कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सकेगी।

ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता

बैठक के अंत में डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि रेरा पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी और आम नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तय समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। स्पष्ट है कि राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र में सख्ती के साथ-साथ व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

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