Site icon The Mountain People

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से बदलेगा राजनीति का स्वरूप: कुसुम कंडवाल बोलीं— महिलाएं अब नीति की निर्माता

 

 

 

देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है और करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतीक है।

कंडवाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को अब “नीति की लाभार्थी” से “नीति की निर्माता” बनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश का वास्तविक विकास “महिला नेतृत्व वाले विकास” से ही संभव है।

महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मजबूत किया है। मुद्रा योजना के तहत करीब 68% ऋण महिलाओं को मिला है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। वहीं 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बालिकाओं की शिक्षा में सुधार हुआ है और माध्यमिक स्तर पर नामांकन 80% से अधिक पहुंच चुका है। ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के तहत करोड़ों खाते खोले गए हैं, जिससे बेटियों का भविष्य सुरक्षित हो रहा है।

उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में सुविधा और सम्मान बढ़ाया है। वहीं ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के तहत करोड़ों महिलाओं को पोषण सहायता मिलने से मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।

राजनीति में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी

कंडवाल ने कहा कि 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जो एक मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने बताया कि लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 में 22 से बढ़कर 2024 में 75 हो चुकी है, लेकिन अभी भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व की जरूरत है। यह अधिनियम उस दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा।

उत्तराखण्ड की विशेष भूमिका

कंडवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड न केवल देवभूमि है, बल्कि नारी शक्ति की भी भूमि है। राज्य सरकार और महिला आयोग इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से विकास अधिक समावेशी और संतुलित होगा और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। अंत में उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करने का आह्वान किया।

 
 
Exit mobile version