तेहरान/वॉशिंगटन : ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा तनाव अब चौथे हफ्ते में पहुंच गया है और इसके असर पूरी दुनिया पर दिखने लगे हैं। खासकर वैश्विक तेल बाजार पर इस संघर्ष का दबाव साफ नजर आ रहा है।
जंग की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद थी कि हालात उनके पक्ष में जाएंगे, लेकिन ईरान के सख्त रुख ने समीकरण बदल दिए हैं। अब अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, जबकि ईरान ने ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
कौन हैं मोहम्मद बघेर गलीबाफ?
ईरान की राजनीति में गलीबाफ एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं।
- 1961 में जन्मे गलीबाफ मिलिट्री बैकग्राउंड से आते हैं
- इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में जनरल रह चुके हैं
- ईरान-इराक युद्ध (1980-88) में सक्रिय भूमिका निभाई
- तेहरान के मेयर और राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख भी रह चुके हैं
- 2005 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं
- वर्तमान में ईरान की संसद के स्पीकर हैं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन उन्हें संभावित वार्ता साझेदार के तौर पर देख रहा है।
बातचीत से ईरान का साफ इनकार
गलीबाफ ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान किसी भी तरह की बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि देश के लोग हमलावरों को कड़ी सजा देने के पक्ष में हैं और सभी अधिकारी सुप्रीम लीडर के साथ खड़े हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और पश्चिमी देश तेल और वित्तीय बाजार को प्रभावित करने के लिए झूठी खबरें फैला रहे हैं।
क्यों बदला ट्रंप का रुख?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब सीधे टकराव से हटकर बातचीत की दिशा में झुकता नजर आ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक तेल संकट को माना जा रहा है।
23 मार्च को ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के एक प्रभावशाली नेता से संपर्क बना हुआ है और कुछ अहम ऊर्जा ठिकानों पर हमले अस्थायी रूप से रोके जा सकते हैं।
दुनिया पर बढ़ता असर
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर तेल सप्लाई पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
आपको बता दें कि ईरान-अमेरिका टकराव अब सिर्फ सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कूटनीति, ऊर्जा और वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा मुद्दा बन चुका है। बातचीत के दावों और इनकार के बीच हालात और जटिल होते जा रहे हैं—अब दुनिया की नजर इस पर है कि अगला कदम युद्ध होगा या वार्ता।