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“ट्रंप के दबाव के बीच भारत ने BRICS को बताया वैश्विक सहयोग का मजबूत मंच, 2026 की मेज़बानी की तैयारियां तेज”

 

 

 

नई दिल्ली: दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के दौर में भारत ने ब्रिक्स (BRICS) को वैश्विक संवाद और सहयोग का एक अहम मंच बताया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ‘BRICS 2026’ के लोगो और आधिकारिक वेबसाइट के अनावरण के मौके पर कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुके हैं, जहां राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु संकट और तकनीकी बदलाव देशों को नई चुनौतियां दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में ब्रिक्स एक ऐसा मंच है, जो विभिन्न विकास स्तरों पर खड़े देशों को साथ लाकर व्यावहारिक समाधान और आपसी सहयोग को बढ़ावा देता है। भारत वर्ष 2026 में विस्तारित ब्रिक्स समूह — जिसमें अब 10 देश शामिल हैं — की अध्यक्षता करेगा और इसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को उसी भव्यता से आयोजित करने की योजना बना रहा है जैसी 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दिखाई गई थी। लोगो लॉन्च कार्यक्रम में सभी सदस्य देशों के राजदूतों के साथ-साथ कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारत इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर बड़ा मंच देना चाहता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर खुलकर असंतोष जता चुके हैं। वह ब्रिक्स देशों पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की भूमिका कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाते रहे हैं और 2025 में इन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा भी कर चुके हैं।

संभावना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जुलाई या अगस्त 2026 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत आने की भी उम्मीद जताई जा रही है। जयशंकर ने कहा कि भारत का फोकस ब्रिक्स को ऐसा मंच बनाने पर रहेगा, जो कृषि, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग और लचीलापन विकसित कर सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर ऐसी संस्थागत क्षमताएं विकसित करना चाहता है, जो वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भी विकास और स्थिरता को बनाए रख सकें।

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