देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” अब उत्तराखंड में सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए समाधान का भरोसेमंद मंच बनता जा रहा है। गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक इस अभियान ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी काफी हद तक कम कर दी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक प्रदेश के सभी 13 जिलों में 297 शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनमें 2 लाख 13 हजार से ज्यादा लोगों ने सीधे पहुंचकर अपनी बात रखी। इन शिविरों में 24 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से बड़ी संख्या में मामलों का मौके पर या तय समय के भीतर समाधान किया जा चुका है।
इन कैंपों का असर सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रहा। हजारों लोगों को प्रमाण पत्र, दस्तावेज और योजनाओं से जुड़ी सेवाएं भी यहीं पर मिलीं। करीब 33 हजार से अधिक लोगों ने विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किए, जबकि एक लाख से ज्यादा नागरिकों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह अभियान दूरदराज और पहाड़ी इलाकों तक सरकार की पहुंच मजबूत कर रहा है। उनका कहना है कि अब लोगों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे, बल्कि सरकार खुद उनके पास आ रही है।
अल्मोड़ा से लेकर हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर और देहरादून तक शिविरों में उमड़ी भीड़ यह दिखाती है कि जनता इस पहल पर भरोसा कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि हर शिकायत और हर आवेदन का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारण किया जाए, ताकि लोगों का विश्वास और मजबूत हो।
धामी ने यह भी कहा कि आने वाले समय में सरकार इसी मॉडल को और विस्तार देगी, ताकि सुशासन और जनसेवा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर भी दिखे।