TMP: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाया है—कामकाज से लेकर पढ़ाई और इलाज तक, हर क्षेत्र में AI क्रांति ला रहा है। लेकिन इसी तकनीक का एक स्याह पहलू अब दुनिया के सामने उभर रहा है। जिन उम्मीदों के साथ AI को अपनाया गया था, वही तकनीक अब आतंक और हिंसा को नई ताकत देने का माध्यम बनती जा रही है। अमेरिका समेत कई देशों की खुफिया एजेंसियों ने चेताया है कि आने वाले समय में AI आतंकवाद को और अधिक खतरनाक बना सकता है।
आतंकियों के हाथ AI, कैसे बदल रहा है खेल?
तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक आतंकी संगठन अब AI का इस्तेमाल प्रचार, भर्ती और दहशत फैलाने के लिए कर रहे हैं। AI की मदद से लोगों का ब्रेनवॉश करना, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ना, सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रोपेगेंडा फैलाना और डीपफेक तस्वीरें व वीडियो बनाना बेहद आसान हो गया है। इसके अलावा साइबर हमले अब पहले से कहीं ज्यादा तेज, सस्ते और प्रभावी हो गए हैं।
हाल ही में आईएस से जुड़ी एक समर्थक वेबसाइट पर अनुयायियों से खुली अपील की गई कि वे AI को अपने अभियानों का हथियार बनाएं, ताकि दुश्मनों के मन में पैदा किया गया डर सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बन सके।
आतंकियों के लिए AI इतना असरदार क्यों?
साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि AI ने ताकत का संतुलन पूरी तरह बदल दिया है। अब सीमित संसाधन रखने वाले छोटे समूह भी ऐसा प्रभाव पैदा कर सकते हैं, जो पहले सिर्फ बड़े संगठनों के बस की बात थी।
कम लागत में बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार करना, असली जैसी नकली तस्वीरें, आवाजें और वीडियो बनाना अब मिनटों का काम है। इससे सच और झूठ की पहचान धुंधली हो जाती है। जब इस सामग्री को सोशल मीडिया एल्गोरिद्म का सहारा मिलता है, तो अफवाह, डर और नफरत तेजी से हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच जाती है।
डीपफेक तस्वीरें और वीडियो कितना बड़ा खतरा?
डीपफेक के खतरों की झलक दुनिया पहले ही देख चुकी है। इजरायल–हमास संघर्ष के दौरान खून से सने बच्चों की कई फर्जी तस्वीरें वायरल हुईं, जिससे नफरत और ध्रुवीकरण बढ़ा। इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल मिडिल ईस्ट और अमेरिका में लोगों की भर्ती के लिए किया गया।
इसी तरह रूस में 2024 के एक आतंकी हमले के बाद AI से बनाए गए प्रचार वीडियो सामने आए, जिन्होंने भ्रम और डर का माहौल पैदा किया।
क्या AI से बड़े हमलों का भी खतरा?
AI विशेषज्ञों की चेतावनी और भी गंभीर है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के अनुसार, भविष्य में आतंकी संगठन AI की मदद से जैविक या रासायनिक हथियार विकसित करने की कोशिश कर सकते हैं। मालवेयर, फिशिंग और साइबर जासूसी में AI का इस्तेमाल पहले से हो रहा है।
इतिहास गवाह है कि आतंकवादी हमेशा नए हथियारों की तलाश में रहते हैं—और AI उनके लिए सबसे घातक विकल्प बन सकता है।
यानी साफ है, AI अब सिर्फ विकास और सुविधा की तकनीक नहीं रहा। सही नियंत्रण और वैश्विक सहयोग के बिना यही तकनीक दुनिया की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा भी बन सकती है।
