लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ पर ऐतिहासिक बहस, पीएम मोदी भी लेंगे हिस्सा

 

 

 

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में इस सप्ताह एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लोकसभा में इस पर 10 घंटे की विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। यह बहस गुरुवार या शुक्रवार को होने की संभावना है। इस चर्चा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भी भाग लेने की पुष्टि मानी जा रही है, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है।

यह पहला अवसर होगा जब संसद में ‘वंदे मातरम’ के इतिहास, साहित्यिक महत्व, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका पर इतनी विस्तृत चर्चा होगी।

ऑल पार्टी मीटिंग में बनी सहमति

सूत्रों के अनुसार, इस विशेष चर्चा का प्रस्ताव हाल ही में हुई ऑल-पार्टी मीटिंग और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठकों में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने 30 नवंबर को सभी दलों की बैठक बुलाई थी, जिसमें इस चर्चा पर सहमति बनी। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटियों ने भी इसे औपचारिक मंजूरी दी।

आजादी की भावना का प्रतीक रहा ‘वंदे मातरम’

सभी दलों के सांसदों में इस चर्चा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कारण यह है कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है, जिसने देशभर में आजादी की भावना को मजबूत किया।

यह चर्चा ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक सफर, उसके साहित्यिक योगदान और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उसकी जन-जन में जागरण की भूमिका को विस्तार से रेखांकित करेगी।

पीएम मोदी पहले भी कर चुके हैं प्रेरक उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी कई अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ की भावनात्मक और प्रेरणादायी शक्ति का उल्लेख कर चुके हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि संकल्पों की सिद्धि का प्रतीक है। आजादी के दौर में यह देश की आत्मा और संकल्प का स्वर बन गया था।

शीतकालीन सत्र का प्रमुख आकर्षण

19 दिनों तक चलने वाले इस शीतकालीन सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश करने जा रही है, लेकिन ‘वंदे मातरम’ पर होने वाली यह विशेष चर्चा सत्र का सबसे बड़ा आकर्षण मानी जा रही है।

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