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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का  किया  शुभारंभ

 

 

 

 



टिहरी गढ़वाल: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जनपद टिहरी गढ़वाल पहुंचकर नौ दिवसीय 49वें श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का ध्वजारोहण कर मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन, विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया तथा अमर शहीदों की प्रतिमाओं एवं स्वतंत्रता संग्राम शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने ढालवाला में बाढ़-सुरक्षा कार्य, मुनिकीरेती में सतह पार्किंग व एप्रोच रोड, नरेन्द्रनगर में क्षतिग्रस्त नहरों के पुनर्निर्माण, नगर पंचायत तपोवन में सामुदायिक भवन निर्माण सहित कई विकास परियोजनाओं की घोषणाएं कीं। साथ ही श्रीदेव सुमन उप जिला अस्पताल में ऑटोमेटिक वेंटिलेटर मशीन की स्वीकृति, नरेंद्रनगर में एएनएम ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और मंदिर सौंदर्यीकरण, पार्किंग व चेक डैम निर्माण जैसे कार्यों को भी मुख्यमंत्री घोषणाओं में शामिल किया गया।

मुख्यमंत्री ने मेले में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मां कुंजापुरी की कृपा दृष्टि से यह क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह ऐतिहासिक मेला लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। 1974 से निरंतर आयोजित हो रहा यह मेला व्यापार, क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को गति प्रदान करता रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित कर रहा है। उत्तराखंड सरकार भी धार्मिक स्थलों के संरक्षण और स्थानीय पहचान को बनाए रखने के लिए निरंतर कार्यरत है।

उन्होंने कहा कि “पलायन रोकना राज्य की प्राथमिकता है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फार्म मशीनरी बैंक, फिल्म नीति, एप्पल मिशन और होमस्टे जैसी योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू की है। साथ ही नकल-विरोधी और धर्मांतरण निवारण कानूनों से राज्य को नई दिशा मिली है।

कार्यक्रम में प्रदेश के वन, तकनीकी शिक्षा, भाषा एवं संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि “मां कुंजापुरी मेला हमारी संस्कृति और परंपरा को जीवंत रखने वाला मंच है। यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि खेल, कला और विकास का प्रतीक भी बन चुका है।”

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