नई दिल्ली: भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का हालिया बयान मध्य प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर गया है। “बेटियों की टांगें तोड़ दो अगर वे गैर-हिंदू के घर जाएं” जैसे शब्दों के साथ दिया गया उनका भाषण अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।
भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि अगर बेटियां माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध जाकर किसी गैर-हिंदू से विवाह करती हैं, तो माता-पिता को कठोर कदम उठाने से हिचकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमारी बेटी किसी गैर-हिंदू के घर जाए, तो उसकी टांगें तोड़ने में कोई कसर न छोड़ें।”
उनका यह बयान सामने आते ही विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि “मध्य प्रदेश में धर्म परिवर्तन के केवल सात मामलों में दोषसिद्धि हुई है, लेकिन भाजपा इससे नफरत फैलाने की राजनीति कर रही है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब राज्य में चुनावी तैयारियां शुरू हो रही हैं और भाजपा अपने पारंपरिक वोटबैंक को मज़बूत करने की कोशिश में है। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के बयान समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाने का काम करते हैं।
हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि साध्वी प्रज्ञा अब सक्रिय राजनीति में नहीं हैं, इसलिए उनके व्यक्तिगत विचारों को पार्टी की नीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
मगर विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में भुनाने की तैयारी में है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा महिला सुरक्षा की बात करती है, लेकिन उसके नेता महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाले बयान देते हैं।
साफ है कि साध्वी प्रज्ञा का यह बयान सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों में नई आग भड़काने वाला मुद्दा बन सकता है।

