चिन्यालीसौड़: उत्तरकाशी जिले के बिजोटी दिवारीखोल में बनने वाला राजीव गांधी नवोदय विद्यालय एक बार फिर सरकारी लापरवाही की मिसाल बन गया है। जिस स्कूल के लिए ग्रामीणों ने अपनी पैतृक 210 नाली भूमि बिना किसी मुआवजे के दान कर दी, उसी विद्यालय की इमारत आज भी अधर में लटकी हुई है।
निर्माण कार्य महीनों से ठप पड़ा है, जबकि विद्यालय फिलहाल राजकीय इंटर कॉलेज चिन्यालीसौड़ के कुछ सीमित कमरों में अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है। स्थिति इतनी बदतर है कि जिन कक्षाओं में बच्चे दिनभर पढ़ाई करते हैं, रात को वहीं फर्श पर सोने को विवश हैं। एक-एक कमरे में 20 से 25 बच्चे ठसाठस भरे रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की अनदेखी से बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। दशग हातड़ बिष्ट पट्टी विकास समिति के अध्यक्ष धनी नाथ ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि जब भूमि भी दान हो चुकी और बजट भी स्वीकृत हो चुका, तो फिर आखिर अड़चन कहाँ है?
ग्रामीणों की यह पुकार सिर्फ एक भवन की नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की शिक्षा और सपनों से जुड़ी है—जो फिलहाल अधूरी इमारत की नींव में दबी पड़ी है।

