देहरादून: उत्तराखंड राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध डीएवी सहित सभी नौ सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराने का दायित्व राज्य सरकार का नहीं, बल्कि संबंधित केंद्रीय विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन का है।
उच्च शिक्षा सचिव डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने इस संबंध में केंद्रीय उच्च शिक्षा सचिव व यूजीसी को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि इन महाविद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां केंद्रीय विश्वविद्यालय के वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर व परिनियमों के अनुसार संचालित होती हैं। इसी के अंतर्गत छात्र संघ चुनाव कराने की प्रक्रिया भी आती है।
डा. सिन्हा ने बताया कि शासन द्वारा 3 जुलाई, 2025 को जारी आदेश में सभी अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को अपने संबद्ध विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर का पालन करने का निर्देश दिया गया है। लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के अनुसार कॉलेज स्तर पर चुनाव कर विश्वविद्यालय प्रतिनिधि चुना जाता है, जिसके बाद छात्र महासंघ का गठन होता है।
इस बीच राज्य सरकार के इस स्पष्ट जवाब से छात्रों में असंतोष भी बढ़ता दिख रहा है, क्योंकि कई छात्र संघ चुनाव पिछले वर्षों से लंबित हैं। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब इस संबंध में निर्णय और कार्यवाही केंद्रीय विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी बनेगी।
इस कदम से यह भी संकेत मिलता है कि राज्य सरकार ने इस विवादित मामले में सीधे हस्तक्षेप से दूरी बना ली है।

