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सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में निगम की भूमि पर अवैध निर्माण, जांच करने पहुंची टीम को लौटाया बैरंग, मामला सुप्रीम कोर्ट से भी जुड़ा

 

 

 

देहरादून: राजधानी देहरादून में रियल एस्टेट माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि अब उन्हें न प्रशासन का डर है, न कानून का। ताजा मामला सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी का है, जहां एक बिल्डर ने न सिर्फ नगर निगम की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया, बल्कि गलत दस्तावेजों के आधार पर नक्शे तक पास करा लिए।

शनिवार को जब नगर निगम की भूमि निरीक्षक सुधा यादव, लेखपाल और पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर जांच के लिए पहुंचीं, तो बिल्डर ने टीम को धमकाकर लौटा दिया। यहां तक कह दिया गया कि फाइल सचिव स्तर पर विचाराधीन है और जांच की अब कोई जरूरत नहीं।

एमडीडीए ने लिया संज्ञान

एटीएस कॉलोनी के निवासियों की शिकायत पर एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नक्शों की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि नक्शा पास कराने के लिए गलत ढंग से रास्ता दर्शाया गया और बिना मार्ग के निर्माण किया गया।

भूमि हस्तांतरण का ‘खेल’

वर्ष 2023-24 में पहली बार मामला तब उजागर हुआ जब नगर निगम की 3800 वर्गमीटर भूमि में से 1250 वर्गमीटर के हस्तांतरण का प्रस्ताव बिल्डर की ओर से आया। बदले में जो भूमि निगम को दी जानी थी, वह ढांग और साल के पेड़ों से घिरी बंजर जमीन थी। एटीएस की भूमि की कीमत जहां 75 हजार रुपये प्रति वर्गगज है, वहीं बदले में दी गई भूमि की कीमत 26-45 हजार रुपये के बीच है।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित है केस

गौरतलब है कि यह जमीन गोल्डन फॉरेस्ट नामक संस्था की है, जिसकी संपत्तियों की नीलामी सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार होनी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मामला शीर्ष अदालत में लंबित है, तो निजी बिल्डर को जमीन कैसे हस्तांतरित की जा रही थी?

यह मामला न सिर्फ नगर निगम और प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह कानूनी दायरे में रहकर भी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अब देखना यह होगा कि नगर निगम और प्रशासन इस पर कितनी तेजी से और कितनी पारदर्शिता से कार्रवाई करता है।

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