“पथरीली पगडंडियों से ओलंपिक ट्रैक तक: मेरुड़ा गांव की अंकिता ध्यानी ने रचा इतिहास, जर्मनी में जीता रजत पदक”

 

 



कोटद्वार: उत्तराखंड की धरती एक बार फिर गौरवान्वित हुई है। लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र के मेरुड़ा गांव की बेटी अंकिता ध्यानी ने जर्मनी में चल रहे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज दौड़ में रजत पदक जीतकर न केवल राज्य का बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है।

23 वर्षीय अंकिता ने 9:31.99 सेकेंड के समय में दौड़ पूरी करते हुए अपने पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 9:39.00 सेकेंड से करीब 7 सेकेंड कम समय लिया, जो उनके कठिन परिश्रम और लगन का प्रमाण है।

अंकिता का यह सफर गांव के प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुआ था, जहां उन्होंने शिक्षिका रिद्धि भट्ट के निर्देशन में दौड़ के शुरुआती गुर सीखे। खेतों में काम करने वाले माता-पिता महिमामंद ध्यानी और लक्ष्मी देवी की यह होनहार बेटी आज ओलंपिक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

अंकिता ने अब तक वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये उपलब्धियां हासिल की हैं:

  • 28 मार्च: सैन मोरक्को (यूएसए) – 3000 मीटर स्टीपलचेज – स्वर्ण पदक

  • 29 मार्च: सैन जुआन (यूएसए) – 1500 मीटर दौड़ – कांस्य पदक

  • 16 अप्रैल: अजूसा (यूएसए) – 3000 मीटर स्टीपलचेज – कांस्य पदक

  • 25 जुलाई: जर्मनी – विश्वविद्यालय खेल – 3000 मीटर स्टीपलचेज – स्वर्ण पदक

  • 27 जुलाई: जर्मनी – विश्वविद्यालय खेल – 3000 मीटर स्टीपलचेज – रजत पदक

अभी भी गांव से जुड़ी:

भले ही अंकिता अभ्यास के कारण अधिक समय गांव में नहीं बिता पातीं, लेकिन उनका अपने गांव मेरुड़ा से विशेष जुड़ाव है। इन दिनों वह गांव में नया मकान बनवा रही हैं। अंकिता कहती हैं, “जिस मिट्टी में चलना सीखा, उसे छोड़ने का ख्याल भी नहीं आता।”

राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग:

अंकिता वर्तमान में 3000 मीटर स्टीपलचेज में विश्वस्तर पर 1185 अंकों के साथ 53वें स्थान पर हैं। साथ ही उन्होंने 2024 के पेरिस ओलंपिक में 5000 मीटर दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

पर्वतीय प्रदेश की बेटियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, बस उन्हें मंच और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। अंकिता की कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह साबित करती है कि सच्ची लगन और मेहनत से हर बाधा पार की जा सकती है।

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