पीटीआई: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस पर प्रमुख विपक्षी दलों ने भी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
जल्द शुरू होगी हस्ताक्षर प्रक्रिया
सरकार यह तय करेगी कि यह प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा में लाया जाएगा। लोकसभा में इसके लिए 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, जिसमें यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
आरोपों की होगी जांच
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत, प्रस्ताव स्वीकार होने पर संसद अध्यक्ष या सभापति तीन सदस्यीय समिति बनाएंगे। इसमें सीजेआई या सुप्रीम कोर्ट के जज, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल होंगे, जो आरोपों की जांच करेंगे।
भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला
रिजीजू ने कहा कि यह मामला न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा है। इसलिए सरकार चाहती है कि सभी राजनीतिक दल इसमें शामिल हों ताकि कार्रवाई पारदर्शी तरीके से हो सके।
दोषी नहीं ठहराए गए, फिर भी कार्रवाई जरूरी
सरकारी आवास पर नकदी मिलने के मामले में बनी जांच समिति की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी नहीं ठहराया गया है। रिजीजू ने बताया कि संसद ही किसी जज को हटाने का अधिकार रखती है, इसलिए आगे की कार्रवाई के लिए यह कदम जरूरी है।
