पंचायत चुनाव की रणभूमि में उतरी कांग्रेस, धामी-भट्ट-मोदी की तिकड़ी से निपटने की बड़ी चुनौती

 

 

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में पंचायत चुनाव को लेकर जबरदस्त हलचल है। राज्य के 47.5 लाख ग्रामीण मतदाताओं को साधने की जद्दोजहद में जहां सत्तारूढ़ भाजपा तीन मजबूत चेहरों—मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी—को लेकर आक्रामक रणनीति में जुटी है, वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव संगठनात्मक एकता और रणनीतिक चतुराई की असली परीक्षा बन गया है।

भाजपा पिछले चुनावों में ‘मोदी ब्रांड’ का भरपूर फायदा उठा चुकी है। चाहे लोकसभा हो, उपचुनाव हों या नगर निकाय चुनाव—हर बार मोदी फैक्टर ने पार्टी को जीत दिलाई है। नगर निगमों में 11 में से सभी सीटें जीतकर भाजपा ने यह साबित भी किया है। अब पार्टी इसी फॉर्मूले के साथ पंचायत चुनाव में भी उतर चुकी है।

मुख्यमंत्री धामी की क्षेत्रीय सक्रियता, महेंद्र भट्ट की संगठन पर मजबूत पकड़ और मोदी का लोकप्रिय चेहरा—भाजपा की यह तिकड़ी कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती बन गई है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को देखते हुए दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।

कांग्रेस की रणनीति:

कांग्रेस ने संगठन में संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने करन माहरा को समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाकर सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लाने का प्रयास किया है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए प्रीतम सिंह और गणेश गोदियाल को राष्ट्रीय समितियों में जगह दी गई है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कांग्रेस कार्यसमिति में बनाए रखा गया है।

करन माहरा का हमला:

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “भाजपा ने खुद ‘एक पद, एक व्यक्ति’ का सिद्धांत दिया था, लेकिन उसे खुद ही तोड़ दिया। यह तानाशाही प्रवृत्ति का प्रमाण है। कांग्रेस जनता को इस राजनीतिक नौटंकी से आगाह करेगी और एकजुट होकर पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी।”

राजनीतिक मायने:

यह पंचायत चुनाव न केवल गांव की सरकार बनाने का माध्यम है, बल्कि राज्य की राजनीतिक हवा का रुख तय करने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत भी होगा। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपने अस्तित्व और संगठनात्मक ताकत को पुनर्स्थापित करने का अवसर है, जबकि भाजपा के लिए यह अपने विजय रथ को गांवों तक पहुंचाने की चुनौती।

राजनीति की यह जंग गांव की गलियों में लड़ी जा रही है। अब देखना होगा कि मतदाता किसकी बातों और चेहरे पर भरोसा जताते हैं—धामी-भट्ट-मोदी की तिकड़ी पर या कांग्रेस की एकजुट रणनीति पर।

 
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