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बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तराखंड में उबाल, अभियंताओं ने देहरादून में किया जोरदार प्रदर्शन

 

 

देहरादून: उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ अब उत्तराखंड के बिजली अभियंता भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के बैनर तले देहरादून में अभियंताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और इसे आम जनता के हितों के खिलाफ बताया।

यह विरोध नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आयोजित किया गया, जो देशभर में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। संगठन ने 9 जुलाई को हड़ताल का भी ऐलान किया है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि निजीकरण लागू हुआ, तो गरीब और मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं को 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीदनी पड़ेगी। सब्सिडी खत्म हो जाएगी और जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

फेडरेशन का आरोप:

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और महासचिव पी. रत्नाकर राव ने यूपी सरकार पर आरोप लगाया कि बिजली विभागों के 14,400 करोड़ रुपये के बकाया बिल को छुपाकर घाटा बताकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कदम घाटे की भरपाई नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति का निजीकरण है, जिससे बिजली उपभोक्ताओं को लालटेन युग में लौटने पर मजबूर होना पड़ेगा।

देहरादून प्रदर्शन में ये रहे शामिल:

उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक राजपूत, अभियंता जसवंत सिंह, एनएस बिष्ट, सौरभ पांडे, मोहित डबराल, प्रदीप पंत, बृजेश यादव, सुभाष कुमार और धनंजय कुमार सहित कई इंजीनियर शामिल रहे।



बिजली के निजीकरण को लेकर देशभर में आंदोलन तेज हो रहा है, और अब उत्तराखंड के अभियंताओं ने भी इसके खिलाफ आवाज़ बुलंद कर दी है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया, तो 9 जुलाई को प्रदेशभर में बिजली कर्मी हड़ताल पर जा सकते हैं, जिससे व्यापक असर पड़ सकता है।

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