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देहरादून में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने खोले राष्ट्रपति निकेतन और तपोवन के द्वार, दिव्यांग छात्रों से की मुलाकात

 

 

 

देहरादून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देहरादून स्थित राष्ट्रपति निकेतन और राष्ट्रपति तपोवन को आम जनता के लिए खोलते हुए कई विकासात्मक पहल की शुरुआत की। उन्होंने राष्ट्रपति निकेतन में राष्ट्रपति उद्यान की आधारशिला रखी और एक एम्फीथिएटर का उद्घाटन भी किया। आगंतुक सुविधा केंद्र, कैफेटेरिया और स्मारिका शॉप जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का भी उद्घाटन किया गया।

हिमालय की तलहटी में फैला 19 एकड़ क्षेत्र का राष्ट्रपति तपोवन जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यहां 117 वनस्पति प्रजातियाँ, 52 तितलियां, 41 पक्षी और 7 जंगली स्तनधारी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। वहीं, राष्ट्रपति निकेतन की ऐतिहासिक विरासत 1838 से जुड़ी है और वर्तमान में यह 21 एकड़ में फैले बाग, ऐतिहासिक इमारतों और लिली तालाब समेत विविध सुविधाओं से समृद्ध है।

132 एकड़ में प्रस्तावित राष्ट्रपति उद्यान एक समावेशी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह सुलभ होगा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, संस्कृति और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें राष्ट्रपति निकेतन, तपोवन और राष्ट्रपति उद्यान की जैव विविधता का विस्तृत विवरण है। इसमें 300 से अधिक वनस्पतियों और 170 जीवों की प्रजातियाँ दर्ज हैं।

राष्ट्रपति ने देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान का दौरा कर छात्रों से संवाद किया। उन्होंने विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति इस बात से मापी जाती है कि वह दिव्यांगजनों के प्रति कितनी संवेदनशीलता रखता है। सुगम्य भारत अभियान के तहत सरकार समावेशी विकास की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

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