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खिल उठी प्रकृति की रंगीन चादर: आज से पर्यटकों के लिए खुली विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’

 

 

TMP: समुद्र तल से 3,600 मीटर की ऊंचाई पर बसी उत्तराखंड की फूलों की घाटी एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित इस घाटी का दरवाजा आज, यानी 2 जून से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है और यह अब अक्टूबर तक खुला रहेगा।

हर साल सैकड़ों रंग-बिरंगे फूलों की 500 से अधिक प्रजातियों से सजने वाली यह घाटी एक जीवंत प्राकृतिक चित्रकला की तरह नजर आती है। पहले ही दिन 49 पर्यटकों ने घाटी की ओर रुख किया, जिससे पर्यटन सीजन की उत्साहजनक शुरुआत मानी जा रही है।

चमोली के जिला पर्यटन अधिकारी बृजेश पांडेय ने जानकारी दी कि इस बार घाटी में पर्यटकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और सभी जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई हैं ताकि यात्रियों को एक सहज, सुरक्षित और यादगार अनुभव मिल सके।

पिछले साल इस घाटी ने 19,500 पर्यटकों को आकर्षित किया था, जिनमें 350 विदेशी सैलानी भी शामिल थे। इससे पार्क प्रशासन को 39 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की आमदनी हुई थी। घाटी में प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित है—भारतीय नागरिकों के लिए 200 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों के लिए 100 रुपये, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए यह शुल्क 800 रुपये है। 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है।

1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित की गई फूलों की घाटी को 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर की मान्यता दी थी। यह स्थान न केवल जैव विविधता का खजाना है, बल्कि उन सैलानियों के लिए भी स्वर्ग है जो प्रकृति से आत्मिक जुड़ाव महसूस करना चाहते हैं।

इस बार भी घाटी अपने चरम सौंदर्य की ओर अग्रसर है—और यदि आप भी प्राकृतिक रंगों और सुगंधों के बीच कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो फूलों की घाटी आपका इंतजार कर रही है।

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