उत्तराखंड के खेतों को मिलेगा और अधिक पानी, सिंचाई योजनाओं की समयबद्ध निगरानी के निर्देश: मुख्य सचिव 

 

 

 

देहरादून : उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी बड़ी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में हर हाल में पूरा किया जाए।

मुख्य सचिव ने आधुनिक तकनीक, सौर ऊर्जा, और ग्राम पंचायतों की भागीदारी के माध्यम से जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग और सतत सिंचाई व्यवस्था की रूपरेखा को मजबूती से आगे बढ़ाने की बात कही।

प्रमुख निर्देश और निर्णय:

  • बड़ी परियोजनाओं की निगरानी सख्ती से:

    सप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक समीक्षा के निर्देश।

    जमरानी, सौंग और बलियानाला लैंडस्लाइड ट्रीटमेंट परियोजनाएं रहेंगी प्राथमिकता में।

  • सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग:

    ड्रोन सर्वे, GIS मैपिंग और रिमोट सेंसिंग से सिंचित-असिंचित क्षेत्र की पहचान।

  • ग्राम पंचायतों की भूमिका बढ़ेगी:

    नहर, नलकूप और लिफ्ट योजनाओं का संचालन पंचायत समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

  • सौर ऊर्जा पर विशेष फोकस:

    सिंचाई विभाग की खाली जमीनों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे।

    1 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय।

    इससे विभाग के बिजली बिलों में भारी बचत होगी।

  • ड्रिप और स्प्रिंकल सिंचाई को बढ़ावा:

    खासकर भूजल संकट वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण को प्राथमिकता।

    पर्वतीय इलाकों में सौर ऊर्जा आधारित लघु सिंचाई योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

बड़ी परियोजनाएं और निवेश:

परियोजना लागत (₹ करोड़ में) समयसीमा
जमरानी बहुउद्देशीय परियोजना ₹ 3808.16 मार्च 2030
सौंग पेयजल परियोजना ₹ 2491.96 दिसंबर 2029

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं से जुड़ी वन एवं पर्यावरण स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि निर्माण कार्यों में कोई देरी न हो।

अनुसंधान और पुनर्जीवन कार्यों पर भी ध्यान:

आईआरआई, रुड़की को जलागम विभाग द्वारा वर्षा आधारित नदियों एवं जलधाराओं के पुनर्जीवन और सतत प्रवाह की निगरानी हेतु कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है।

सहभागिता और प्रस्तुतिकरण:

बैठक में सचिव आर. राजेश कुमार द्वारा दोनों विभागों की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।

उन्होंने बताया कि बांध, बैराज, जलाशय और चेक डैम जैसे संरचनाओं का निर्माण जल संचयन, सिंचाई और पेयजल के लिए किया जा रहा है।उत्तराखंड की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सिंचाई योजनाओं से मिलने वाला यह नई ऊर्जा का संचार है। मुख्य सचिव की समीक्षा और सख्त दिशा-निर्देश यह संकेत हैं कि अब जल संरक्षण, स्मार्ट सिंचाई और समयबद्ध विकास कार्य ही राज्य की प्राथमिकता हैं।

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