TMP: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी पुरानी आदत पर लौटते हुए संघर्षविराम (Ceasefire) समझौते की धज्जियां उड़ानी शुरू कर दी हैं। भारतीय सेना के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पिछले बुधवार के हमले के बाद से अब तक पाकिस्तान की ओर से 12 बार बिला उकसावे फायरिंग की गई है, जबकि वर्ष 2025 में हमले से पहले केवल दो उल्लंघन दर्ज हुए थे। अब तक संघर्षविराम उल्लंघनों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो चुकी है।
सेना सूत्रों के मुताबिक, 2021 में भारत-पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुए संघर्षविराम समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर शांति का माहौल था। 2022 से 2024 के बीच मात्र चार उल्लंघन हुए थे। मगर अब पहलगाम हमले के बाद हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
संघर्षविराम समझौते की कहानी: शांति से फिर तनाव तक
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पहले बताया था कि फरवरी 2021 के बाद चार महीनों में महज छह उल्लंघन रिकॉर्ड हुए थे। समझौते से पहले हालात बेहद खराब थे — 2018 में 2140, 2019 में 3479 और 2020 में तो रिकॉर्ड 5133 संघर्षविराम उल्लंघन हुए थे। वर्ष 2021 के पहले दो महीनों में ही 658 घटनाएं दर्ज की गई थीं। फरवरी 2021 में दोनों देशों ने एलओसी पर “सख्त संघर्षविराम” के पालन का संयुक्त बयान जारी किया था, जिससे फायरिंग की घटनाओं में बड़ी गिरावट आई थी।
उत्तर से दक्षिण तक फैला तनाव
ताजा घटनाओं में बारामुला, कुपवाड़ा और पुंछ जिलों में फायरिंग दर्ज की गई है। यह इस बात का संकेत है कि संघर्षविराम उल्लंघन अब उत्तर कश्मीर से लेकर जम्मू रीजन तक फैलने लगा है। रविवार रात की घटनाओं के दौरान भारतीय सेना ने भी अज्ञात पाकिस्तानी पोस्टों पर जोरदार जवाबी कार्रवाई की।
पहलगाम हमले के बाद उरी, तंगधार और गुरेज सेक्टरों में भी भारतीय सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना अब हर मोर्चे पर सतर्क है और हर उकसावे का “तीव्र और निर्णायक” जवाब दे रही है।
स्पष्ट संदेश: हर गोली का जवाब दुगुनी ताकत से
भारतीय सेना का रुख साफ है — संघर्षविराम की आड़ में किसी भी आतंकी मंसूबे या उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक रक्षा अधिकारी ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, मगर मजबूरी में जवाब देना भी जानते हैं।”
जैसे-जैसे घटनाएं बढ़ रही हैं, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिर से एक खतरनाक मोड़ पर पहुँचता दिख रहा है। आने वाले दिनों में हालात और किस दिशा में जाएंगे, इस पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं।

