TMP : उत्तराखंड निकाय चुनाव के दिन वोट ढूंढने की जद्दोजहद सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं रही। इस बार पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और दून अस्पताल के पूर्व एमएस डॉ. केसी पंत भी अपनी लोकतांत्रिक ताकत का इस्तेमाल करने के लिए बूथों के चक्कर काटते नजर आए।
हरीश रावत का नाम वोटर लिस्ट से गायब होने की खबर ने हलचल मचा दी है, जबकि डॉ. केसी पंत ने बताया कि उनके पूरे परिवार के नाम सूची से गायब हैं। बार-बार बूथ बदलने के बावजूद उन्हें कोई समाधान नहीं मिला।
डॉ. पंत ने सवाल उठाया कि इस बार चुनाव अधिकारियों ने मतदाता स्लिप तक नहीं पहुंचाई, जिससे मतदाताओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करने जैसा बताया।
अब सवाल यह है कि जब बड़े नाम ही वोटर लिस्ट से गायब हैं, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी? क्या चुनावी व्यवस्थाओं की यह खामी लोकतंत्र के मूलभूत अधिकारों को खतरे में डाल रही है?