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“खटीमा नगर पालिका चुनाव: सीएम धामी के गृहनगर में बीजेपी-कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबले के आसार”

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खटीमा: नगर पालिका अध्यक्ष पद की सामान्य सीट ने इस बार खटीमा को चुनावी रणक्षेत्र में बदल दिया है। बीजेपी और कांग्रेस के दावेदारों की लंबी सूची के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प होता दिख रहा है। बीजेपी से 11 और कांग्रेस से 7 दावेदार मैदान में हैं, जबकि आम आदमी पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशी भी ताल ठोकने की तैयारी कर रहे हैं।

सीमा विस्तार के बाद बदले समीकरण
20 वार्डों वाली खटीमा नगर पालिका में हालिया सीमा विस्तार के कारण पर्वतीय और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। नगर पालिका खटीमा, जिसे परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, अब बीजेपी के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय बन गई है।

सीएम धामी का गृहनगर: बीजेपी के लिए चुनौती और मौका
सीएम पुष्कर सिंह धामी का गृह क्षेत्र होने के कारण बीजेपी किसी भी कीमत पर यह सीट जीतना चाहेगी। सीएम के करीबी रमेश चंद्र जोशी उर्फ रामू जोशी को टिकट मिलने की संभावना है। वहीं, कांग्रेस में उमेश राठौर उर्फ बॉबी और राशिद अंसारी को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

कांग्रेस की परंपरागत सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला
1961 में स्थापना के बाद से खटीमा नगर पालिका अधिकांश समय कांग्रेस के कब्जे में रही है। हालांकि, इस बार बीजेपी की सक्रियता और प्रदेश व केंद्र में पार्टी की सरकार होने से मुकाबला बेहद कड़ा होने की संभावना है।

निर्दलीय और आम आदमी पार्टी का गणित
आम आदमी पार्टी इस बार पूर्व सैनिक को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। वहीं, कई निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं, जो मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकते हैं।

क्या होगा खटीमा के विकास का सिरमौर?
नगर पालिका खटीमा के मतदाता अब तक विकास के मुद्दे पर चुप हैं। दोनों विधानसभाओं – खटीमा और नानकमत्ता के कांग्रेस विधायक भी अपनी जीत को दोहराने के लिए रणनीति बना रहे हैं। मतदाता किसे सिरमौर बनाएंगे, यह सवाल अभी यक्ष बना हुआ है।

चुनाव के प्रति बढ़ती दिलचस्पी
सीमा विस्तार, बदले समीकरण, और बढ़ते दावेदारों के कारण खटीमा का यह चुनाव केवल स्थानीय राजनीति नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

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