गुलदार के हमले में 5 साल की आरुषि की मौत से पौड़ी में उबाल, पांच घंटे हाईवे जाम; DFO से धक्का-मुक्की, वन अधिकारी बंधक

 

 

 

TMP : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का संकट एक बार फिर गंभीर सवाल बनकर सामने आया है। पौड़ी के वजली गांव में गुलदार के हमले में पांच वर्षीय मासूम आरुषि की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बुधवार को खांड्यूसैंण के पास पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर ग्रामीणों ने करीब पांच घंटे तक जाम लगाकर प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। DFO के साथ धक्का-मुक्की हुई, जबकि SDO और अन्य वनकर्मियों को करीब तीन घंटे तक एक कमरे में बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है।

DM के नहीं पहुंचने पर भड़के ग्रामीण, वन मंत्री पर भी निशाना

सुबह करीब आठ बजे क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण खांड्यूसैंण पहुंचे और सड़क पर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि घर के आंगन तक गुलदार की पहुंच और बच्चों पर हमलों ने ग्रामीणों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। इसके बावजूद प्रशासन और वन विभाग की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संयुक्त मजिस्ट्रेट के मौके पर नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक महिला और मां होने के नाते भी प्रशासन पीड़ित परिवार का दर्द क्यों नहीं समझ पा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने वन मंत्री पर भी क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की।

DFO को घेरा, SDO और वनकर्मियों को बनाया बंधक

ग्रामीणों से बातचीत के लिए पहुंचे गढ़वाल वन प्रभाग के DFO महातिम यादव को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई के प्रयास का आरोप है। पुलिस और वनकर्मियों के हस्तक्षेप से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।

वहीं, गढ़वाल वन प्रभाग की SDO आयशा बिष्ट और अन्य वनकर्मियों को ग्रामीणों ने एक कमरे में बंद कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें करीब तीन घंटे बाद मुक्त कराया गया।

DFO के साथ हुए घटनाक्रम और अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। दोपहर एक बजे तक जिलाधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने के बाद ग्रामीण जिला मुख्यालय पौड़ी पहुंचे और एजेंसी चौक पर धरना दिया। दोपहर ढाई बजे से शुरू हुआ प्रदर्शन शाम करीब साढ़े चार बजे तक जारी रहा।

15 मौतों का दावा, गुलदार को मारने की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता विनोद दनोसी ने दावा किया कि इडवालस्यूं पट्टी और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार के हमलों में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय विभाग अन्य गतिविधियों में व्यस्त है।

प्रदर्शनकारियों ने गुलदार को तत्काल मारने, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और गुलदार को फिफ्थ शेड्यूल से हटाने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि शाम होते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं और बच्चों को अकेले बाहर भेजना भी जोखिम भरा हो गया है।

DFO की शिकायत पर मुकदमा दर्ज

प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट और सरकारी अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। DFO महातिम यादव की तहरीर पर विनोद दनोसी निवासी गडोली समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

कोतवाली पौड़ी के प्रभारी जयपाल नेगी के अनुसार, मामले की जांच उपनिरीक्षक प्रवीण रावत को सौंपी गई है। मुकदमे में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, लोक सेवक के साथ मारपीट और बंधक बनाने सहित अन्य धाराएं शामिल की गई हैं। DFO का जिला अस्पताल पौड़ी में मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।

आज DM कार्यालय तक रैली निकालेंगे ग्रामीण

आरुषि की मौत के विरोध में ग्रामीणों ने गुरुवार को भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत पौड़ी के नए बस अड्डे से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल: आखिर पहाड़ के गांवों में इंसान और वन्यजीव के बीच बढ़ता संघर्ष कब रुकेगा? एक मासूम की जान जाने के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण सुरक्षा मांग रहे हैं, वहीं विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ हुई घटनाओं ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था की नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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