राहुल-प्रियंका के उत्तराखंड दौरे पर भाजपा का पलटवार, भट्ट बोले- कांग्रेस नेतृत्व का आना हमारे लिए फायदेमंद

 

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज होने लगा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के आने से प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि उनका दौरा भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा। भट्ट ने दावा किया कि प्रदेश की जनता ने एक बार फिर भाजपा के पक्ष में कमल खिलाने का मन बना लिया है।

भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान भट्ट ने राहुल और प्रियंका के दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के पास सीमित चेहरे ही रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व पहले भी देवभूमि के अपमान से जुड़े विवादों के लिए जिम्मेदार रहा है। ऐसे में उनके दौरे से जनता के पुराने जख्म फिर हरे होंगे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी की रैलियां आयोजित हो रही हैं और संगठन स्तर पर चुनाव प्रबंधन को गति दी जा रही है।

जेनी प्रकरण पर बोले- सामने आए पीड़िता का पक्ष

जेनी प्रकरण को लेकर पूछे गए सवाल पर महेंद्र भट्ट ने कहा कि यह मामला कांग्रेस शासनकाल के दौरान का है। उन्होंने पीड़िता जेनी के सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने की इच्छा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और उत्तराखंड पर लगे कलंक को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उन्होंने जोर दिया कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना चाहिए।

हरक सिंह को मानहानि के मुकदमे की चेतावनी

कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की बयानबाजी पर भी भट्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि हरक सिंह बिना तथ्यों की पुष्टि किए नंदप्रयाग से जुड़ी घटनाओं को लेकर बयान दे रहे हैं। भट्ट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हरक सिंह ने तथ्यहीन आरोपों का सिलसिला जारी रखा तो वह मानहानि का दावा करने पर विचार करेंगे।

कांग्रेस की भूमि बचाओ यात्रा पर भी निशाना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस की भूमि बचाओ यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों से जुड़े विवादों का इतिहास कांग्रेस शासनकाल से जुड़ा रहा है। भट्ट के मुताबिक, सरकार की नई भूमि नीति का उद्देश्य अनुपयोगी सरकारी भूमि का बेहतर इस्तेमाल कर रोजगार के अवसर पैदा करना है, जबकि कांग्रेस इसका विरोध कर विकास और रोजगार की संभावनाओं को प्रभावित करना चाहती है।

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