अंकिता केस में दोषियों को फिर झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज कीं

 

 

 

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों दोषियों को उत्तराखंड हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत नहीं मिली। बुधवार को अदालत ने तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

हत्याकांड के बाद सरकार ने मामले की जांच को प्राथमिकता देते हुए एसआईटी का गठन, विस्तृत चार्जशीट और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया। जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और अहम साक्ष्य शामिल थे। आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।

परिवार की मांगों पर भी सरकार ने उठाए कदम

सरकार के अनुसार, पीड़ित परिवार की मांगों को ध्यान में रखते हुए सरकारी अधिवक्ता में बदलाव किया गया और सीबीआई जांच की मांग पर केंद्र को संस्तुति भेजी गई। परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ अंकिता के पिता और भाई को रोजगार भी दिया गया।

‘वीआईपी’ एंगल पर सरकार का जवाब

कथित ‘वीआईपी’ को लेकर उठते रहे सवालों पर सरकार ने कहा कि यदि किसी के पास ठोस तथ्य या साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसी अथवा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि मामले में न्याय की प्रक्रिया जांच, साक्ष्यों और न्यायालय के फैसले के आधार पर आगे बढ़ी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना के बाद स्पष्ट किया था कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।

 
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