देहरादून: नैनीताल के ज्योलिकोट में दूषित पेयजल प्रकरण को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में व्यापक फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद घटना की जानकारी समय पर नहीं मिलना गंभीर विषय है। उन्होंने शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और ट्यूबवेल ऑपरेटर समेत फील्ड कर्मचारियों के माध्यम से प्रभावी सूचना एवं फीडबैक सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।
सभी प्रमुख पेयजल योजनाओं की होगी जियो मैपिंग
मुख्य सचिव ने प्रदेश की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग और जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने को कहा। इसके तहत पानी के स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने वाली पूरी व्यवस्था—स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन और क्रॉसिंग प्वाइंट्स—का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
उन्होंने अगले 15 दिनों में प्रमुख पेयजल योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए। जांच के दौरान संभावित लीकेज, सीवर और पेयजल लाइनों के क्रॉसिंग, टैंकों की सफाई, क्लोरीनेशन रिकॉर्ड और पानी में कॉलीफॉर्म समेत अन्य मानकों की जांच की जाएगी।
पुरानी पाइपलाइनों और संवेदनशील क्रॉसिंग प्वाइंट्स को चिन्हित कर आवश्यक मरम्मत या पाइप बदलने की कार्रवाई करने को भी कहा गया।
पेयजल और सीवर लाइनों की जांच के लिए बनेगी एसओपी
मुख्य सचिव ने पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद दूषित पानी की घटना सामने आती है, तो यह तय किया जाना चाहिए कि किस स्तर पर एसओपी का पालन नहीं हुआ।
उन्होंने प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।
यूकेपीसीबी करेगा पेयजल की नियमित टेस्टिंग
मुख्य सचिव ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एसटीपी, सतही जल और प्रमुख शहरों के पेयजल की नियमित गुणवत्ता जांच की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का औचक निरीक्षण कराने को कहा गया।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि दूषित पेयजल की सूचना मिलते ही तत्काल मेडिकल टीम मौके पर भेजी जाए। सीएमओ और सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को सक्रिय रखते हुए डॉक्टरों की टीम तैनात करने तथा अगले 15 दिनों में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस और जांच पूरी करने को कहा गया।
स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करने पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित समितियां सिर्फ औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहें। उन्हें जमीनी अधिकारियों से नियमित फीडबैक लेकर स्थायी सर्विलांस मैकेनिज्म के रूप में काम करना होगा।
उन्होंने पुराने जल नेटवर्क, पाइपलाइनों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने के लिए सेवानिवृत्त लाइनमैन और अनुभवी फील्ड कर्मचारियों की मदद लेने का सुझाव दिया।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।