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यूआईआईडीबी की जमीन पर भाजपा का पलटवार, भट्ट बोले- 18 हेक्टेयर भूमि ही बोर्ड के नाम

 

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की जमीन को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने दावा किया कि यूआईआईडीबी के नाम पर फिलहाल सिर्फ 18 हेक्टेयर भूमि है। उन्होंने कांग्रेस के उस आरोप को गलत बताया, जिसमें राज्य की करीब सात हजार बीघा जमीन निजी कंपनियों को देने की बात कही जा रही है।

भट्ट ने कहा कि यूआईआईडीबी का उद्देश्य सरकारी भूमि का स्वामित्व खत्म करना नहीं, बल्कि अनुपयोगी भूमि का नियमों के तहत आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल कराना है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के माध्यम से पर्यटन, शिक्षा, कृषि, उद्यान, वेलनेस और अन्य क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।

जमीन बेचने का नहीं, लीज मॉडल से निवेश का दावा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार की नीति में सरकारी भूमि का मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा। निवेश के लिए निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के तहत लीज मॉडल अपनाया जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से खाली पड़ी सरकारी जमीन से न रोजगार पैदा होता है और न स्थानीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षित लाभ मिलता है।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी के जरिए ऐसी जमीन का योजनाबद्ध उपयोग कर निवेश लाने की कोशिश है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार के नए अवसर बन सकें।

कांग्रेस पर पुराने भूमि सौदों को लेकर निशाना

भट्ट ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसके शासनकाल में औद्योगिक और आईटी परियोजनाओं के लिए आवंटित जमीन का मुद्दा उठाया। उन्होंने देहरादून आईटी पार्क, सिडकुल और अन्य परियोजनाओं से जुड़े पुराने भूमि आवंटनों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से अपने कार्यकाल का रिकॉर्ड देखने को कहा।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज निवेश के लिए भूमि उपलब्ध कराने की नीति पर सवाल उठा रही है, जबकि उसके शासनकाल में भी उद्योगों और निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने सेलाकुई, रोशनाबाद और रुद्रपुर सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े निवेश के लिए सरकार को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पड़ते हैं।

छरबा एजुकेशन सिटी का भी किया बचाव

भट्ट ने छरबा एजुकेशन सिटी को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि परियोजना में करीब एक हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है और इससे तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही रिसर्च, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की बात कही।

उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए यूपीईएस जैसी संस्था का चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया है।

कांग्रेस के आरोपों को बताया चुनावी राजनीति

भट्ट ने कहा कि यूआईआईडीबी को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोप विकास और निवेश की प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश हैं। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड राज्य की जीडीपी दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि निवेश के लिए सरकारी स्तर पर भूमि उपलब्ध कराना गलत है तो कांग्रेस शासित राज्यों में उद्योगों और निवेशकों को जमीन और अन्य संसाधन कैसे उपलब्ध कराए जाते हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की नीति नियम, पारदर्शिता और नियोजित निवेश पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार राजनीतिक पराजय के चलते कांग्रेस राज्य में हो रहे विकास कार्यों को लेकर नकारात्मक अभियान चला रही है।

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की ओर से जारी बयान में भी कांग्रेस के आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा गया कि राज्य की सरकारी भूमि का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा और निवेश आकर्षित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही उसका उपयोग किया जाएगा।

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