NEET Protest पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस कार्रवाई की होगी निष्पक्ष जांच? पूर्व CJI की अगुवाई में SIT के संकेत

 

 

 

नई दिल्ली: देशभर में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा के आरोप अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पहुंच गए हैं। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा है कि कानून को हाथ में लेने वाला कोई भी व्यक्ति—चाहे वह प्रदर्शनकारी हो या पुलिसकर्मी—बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने के संकेत भी दिए हैं।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि देशभर में दर्ज सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए जोड़ा जाएगा, ताकि पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच हो सके।

पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कई गंभीर आरोप रखे गए। याचिकाओं में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान शॉक बैटन, पैलेट गन और कथित तौर पर कीलों वाली लाठियों का इस्तेमाल किया गया। एक 19 वर्षीय छात्रा के गंभीर रूप से घायल होने, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, वकीलों पर हमले और सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा कथित हिंसा के आरोप भी लगाए गए।

कोर्ट ने कहा कि यदि तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होना आवश्यक है।

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पुलिसकर्मियों पर हमलों की भी होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने केवल छात्रों के आरोपों पर ही नहीं, बल्कि घायल पुलिसकर्मियों के दावों पर भी जांच की जरूरत बताई। अदालत ने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि पुलिस पर हुए हमले छात्रों ने किए थे या प्रदर्शन में घुसे उपद्रवी तत्वों ने।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि किसी पक्ष ने हिंसा की है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

केंद्र का दावा- उपद्रवी तत्वों ने बिगाड़ा माहौल

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों के खिलाफ हिंसा को हल्के में नहीं ले रही है। हालांकि उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवी तत्व भी शामिल हो गए थे, जिन्होंने पुलिस पर हमला किया। केंद्र ने दावा किया कि हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस जैसे मामलों में वांछित कुछ आरोपी भी भीड़ का हिस्सा बने थे।

150 छात्रों की हिरासत पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि अभी भी लगभग 150 प्रदर्शनकारी पुलिस हिरासत में हैं, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत स्वतंत्र एसआईटी के गठन का आदेश देती है तो देशभर में हुए NEET विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई की व्यापक जांच का रास्ता साफ हो सकता है।

 
 
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