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वन उपज रक्षकों को हाईकोर्ट से राहत, पुराने ग्रेड-पे के आधार पर मिलेगा वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ

 

 

 

 

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन उपज रक्षकों (फॉरेस्ट प्रोड्यूस गार्ड) को बड़ी राहत देते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के वेतन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण (लीव इनकैशमेंट) की गणना पहले से स्वीकृत ग्रेड-पे के आधार पर की जाए।

यह आदेश रमेश चंद्र आर्य और अन्य वन उपज रक्षकों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने पुराने ग्रेड-पे के आधार पर सेवा लाभों की पुनर्गणना करने और अंतर की बकाया राशि ब्याज सहित दिलाने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि यह मामला हाईकोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा 12 फरवरी 2025 को दिए गए ‘ललित चंद्र तिवारी बनाम उत्तराखंड राज्य’ के फैसले से पूरी तरह आच्छादित है। उत्तराखंड वन विकास निगम की ओर से भी इस तथ्य का विरोध नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने 8 जुलाई 2026 को पूर्व निर्णय के आधार पर याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान की।

उमेदपुर अतिक्रमण मामले में भी हाईकोर्ट सख्त

इसी दौरान हाईकोर्ट ने देहरादून के विकासनगर स्थित ईस्ट होप टाउन के उमेदपुर क्षेत्र में सरकारी भूमि और बरसाती नाले पर कथित अतिक्रमण के मामले में भी सुनवाई की।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिलाधिकारी देहरादून और संबंधित वन अधिकारियों को 27 जुलाई तक शपथपत्र दाखिल कर यह बताने के निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

जनहित याचिका में देहरादून निवासी प्रभु दयाल शर्मा ने आरोप लगाया है कि विकासनगर के उमेदपुर क्षेत्र में करीब 15 बीघा सरकारी नाले की भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर उसे प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि जांच समिति ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि की थी और अतिक्रमण हटाने की सिफारिश भी की थी, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत से अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।

 
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