नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की बढ़ती समस्या पर अंकुश लगाने के लिए तीन वर्षीय व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी किया है, जिसके तहत देश को नशा मुक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, सख्त निगरानी और संस्थागत सुधारों पर जोर दिया जाएगा।
96 पन्नों के इस रोडमैप के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को सौंपी गई है। अभियान में केंद्र सरकार के 39 मंत्रालयों के अलावा राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स भी साझेदार होंगी।
एयरपोर्ट पर AI करेगा संदिग्ध यात्रियों की पहचान
योजना के तहत मार्च 2027 तक देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग आधारित पैसेंजर प्रोफाइलिंग सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम यात्रियों के यात्रा पैटर्न और अन्य संकेतकों का विश्लेषण कर ड्रग तस्करी से जुड़े संदिग्ध लोगों की पहचान करने में मदद करेगा।
ड्रग तस्करों की वापसी के लिए बनेगा प्रत्यर्पण पोर्टल
सरकार विदेशों में छिपे ड्रग अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज करेगी। इसके लिए गृह मंत्रालय जुलाई के अंत तक विशेष प्रत्यर्पण पोर्टल शुरू करेगा। लक्ष्य है कि मार्च 2029 तक 100 बड़े ड्रग अपराधियों को भारत लाकर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही सीमा सुरक्षा बल (BSF), आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स जैसी एजेंसियों में अलग नारकोटिक्स सेल स्थापित किए जाएंगे। वहीं प्रमुख एकीकृत चेक पोस्टों पर 26 फुल बॉडी ट्रक स्कैनर लगाए जाएंगे, जिससे मालवाहक वाहनों के जरिए होने वाली ड्रग तस्करी पर रोक लगाई जा सके।
आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में होगी ड्रग स्क्रीनिंग
सरकार ने युवाओं को नशे से बचाने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों पर भी विशेष फोकस किया है। योजना के तहत आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित 170 केंद्रीय वित्तपोषित संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से ड्रग स्क्रीनिंग व्यवस्था लागू की जाएगी।
एम्स दिल्ली के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र द्वारा तैयार मानक प्रक्रिया (SOP) के आधार पर अगले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक छात्रों को स्टूडेंट वेलनेस प्रोग्राम से जोड़ा जाएगा, ताकि नशे की शुरुआती पहचान कर समय रहते परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
दवाओं की डिजिटल निगरानी और ई-फार्मेसी पर नियंत्रण
सरकार प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है। सितंबर तक ऐसी दवाओं पर क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य की जाएगी। मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी निगरानी और मोबाइल ऐप के माध्यम से दवा वितरण की व्यवस्था लागू होगी, जबकि दिसंबर तक ई-फार्मेसी के संचालन के लिए नियामकीय ढांचा भी लागू किया जाएगा।
100 बड़े ड्रग नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य
विजन डॉक्यूमेंट के तहत दिसंबर 2027 तक देश के 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग कार्टेल की पहचान करने और मार्च 2029 तक उनके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह केवल एक नीति दस्तावेज नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, सख्त कानून और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के जरिए देश को नशे के खतरे से मुक्त करने की दीर्घकालिक कार्ययोजना है।
