UKSSSC पेपर लीक केस: आरोपियों को अदालत से झटका, SIT के अतिरिक्त दस्तावेज देने से इनकार
The Mountain People
देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की वर्ष 2022 की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपियों को विशेष CBI अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपियों ने SIT जांच के ऐसे दस्तावेज और गवाहों के बयान उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिन्हें CBI ने अपनी चार्जशीट में शामिल नहीं किया है।
विशेष CBI न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोप तय करने के मौजूदा चरण में केवल वही दस्तावेज प्रासंगिक हैं, जिन पर जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट आधारित की है। जिन दस्तावेजों पर CBI ने भरोसा नहीं किया, उनकी प्रतियां इस स्तर पर उपलब्ध कराने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
आरोपियों की मांग क्यों हुई खारिज?
बचाव पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया था कि SIT जांच के दौरान जुटाए गए सभी दस्तावेज और गवाहों के बयान भी उपलब्ध कराए जाएं, भले ही CBI ने उन्हें अपनी जांच का हिस्सा न बनाया हो। इस पर CBI ने अदालत को बताया कि ऐसे दस्तावेज उसकी चार्जशीट में शामिल नहीं हैं और इसलिए उन्हें उपलब्ध कराने का सवाल नहीं उठता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
विशेष अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपियों को ऐसे दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराई जा सकती है, लेकिन उनकी प्रतियां चार्ज फ्रेम होने के चरण में देने का कोई प्रावधान नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष को किसी दस्तावेज की आवश्यकता महसूस होती है, तो वह विधिक प्रक्रिया के तहत उपयुक्त समय पर नया आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
क्या है मामला?
21 सितंबर 2022 को आयोजित UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद व्यापक जांच शुरू हुई थी। पहले पुलिस और SIT ने मामले की जांच की, जिसके दौरान कथित मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत, खालिद सैफी, साबिया सैफी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में मामले की जांच CBI को सौंपी गई और वर्तमान में सभी आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।