नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है। फुजैरा स्थित फुजैरा पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन (FOIZ) पर हुए ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। अप्रैल में अमेरिका-ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद इसे पहला बड़ा उल्लंघन माना जा रहा है।
भारत ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। PM नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमले किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने यूएई के साथ भारत की एकजुटता दोहराई और सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट कहा कि नागरिक ठिकानों पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमले में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ कई ड्रोन दागे गए, जिनमें अधिकांश को निष्क्रिय कर दिया गया। हालांकि एक ड्रोन फुजैरा इंडस्ट्रियल जोन में आग लगाने में सफल रहा।
यूएई ने इस घटना को सार्वजनिक स्थलों पर “आतंकवादी हमला” करार दिया है और जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा है। वहीं ईरान ने किसी भी पूर्व-नियोजित हमले से इनकार करते हुए इसे अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ा बताया है।
यह घटना भारत के लिए भी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि यूएई में करीब 40 लाख भारतीय काम करते हैं और बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश भेजते हैं। इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी यह क्षेत्र बेहद अहम है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाला तेल और गैस परिवहन भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।
फुजैरा पर हुआ यह हमला न सिर्फ क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी रणनीतिक और आर्थिक चिंता बढ़ाने वाला घटनाक्रम है।