TMP : PM Modi ने शनिवार, 18 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करते हुए सीधे देश की माताओं, बहनों और बेटियों से संवाद किया। उनका स्वर भावुक भी था और राजनीतिक रूप से तीखा भी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की भारतीय नारी अब जागरूक है, हर घटना को समझती है और सच-झूठ का फर्क पहचानती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हर मुद्दा अब केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का विषय बन चुका है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर क्या बोले पीएम
Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे “महिलाओं को अधिकार देने वाला ऐतिहासिक प्रयास” बताया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन दशकों से लंबित था और इसका उद्देश्य महिलाओं को नई उड़ान देना और उनके रास्ते की बाधाएं हटाना था।
पीएम ने इसे “देश की आधी आबादी के अधिकार का उत्सव” बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का एक पवित्र संकल्प था।
विपक्ष पर सीधा हमला
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों—कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी—पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीति “भ्रम और स्वार्थ” पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया, तब कुछ दलों का रवैया निराशाजनक था।
उन्होंने कहा,
“जब दलहित, देशहित से बड़ा हो जाता है, तब उसका खामियाजा देश की नारी शक्ति को भुगतना पड़ता है।”
महिलाओं से मांगी माफी
प्रधानमंत्री का संबोधन उस समय भावुक हो गया जब उन्होंने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद यह संशोधन पारित नहीं हो सका। उन्होंने देश की महिलाओं से क्षमा मांगते हुए कहा कि उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाने का उन्हें दुख है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नारी अपने सम्मान से जुड़े मुद्दों को कभी नहीं भूलती और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।
बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री के इस संबोधन को केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण को लेकर राष्ट्रीय बहस के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को “नीति की लाभार्थी” से आगे बढ़ाकर “नीति की निर्माता” बनाना है।
इस भाषण ने जहां एक ओर महिला अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में ला दिया, वहीं दूसरी ओर आने वाले राजनीतिक समीकरणों के संकेत भी दे दिए हैं।