देहरादून: विकास और प्रकृति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है, इसका बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे का एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर। 12 किलोमीटर लंबा यह अनोखा कॉरिडोर न सिर्फ इंजीनियरिंग का कमाल है, बल्कि वन्य जीवों के लिए सुरक्षित ‘फ्री मूवमेंट जोन’ भी बन गया है।
इस कॉरिडोर से गुजरते वक्त यात्रियों को नीचे खुले जंगल में घूमते वन्य जीवों का नजारा देखने को मिलता है—जो सफर को यादगार बना देता है।
तीन हिस्सों में बंटा ‘ग्रीन कॉरिडोर’
भारतीय वन्य जीव संस्थान की योजना के तहत इस कॉरिडोर को गणेशपुर, मोहंड और आसारोडी (देहरादून) जोन में विकसित किया गया है। यह पूरा इलाका वन्य जीवों की सक्रियता वाला क्षेत्र है, जहां अब उनका आवागमन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गया है।
राजाजी के जंगलों के बीच निकला स्मार्ट समाधान
एक्सप्रेस-वे का अंतिम हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे संवेदनशील इलाके में सड़क बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन एलिवेटेड कॉरिडोर ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में वन भूमि के सीमित उपयोग के साथ इस परियोजना को बिना बड़े मानव विस्थापन के पूरा किया गया—जो इसे और खास बनाता है।
दुर्घटनाएं घटीं, वन्य जीवन बढ़ा सुरक्षित
कॉरिडोर बनने के बाद हाथी, नीलगाय, सांभर, तेंदुआ और जंगली सूअर जैसे वन्य जीव अब बिना बाधा के आवाजाही कर रहे हैं। वन्य जीवों की सड़क हादसों में होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
पर्यावरण को ‘बड़ा बोनस’
यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ी राहत है—
- ध्वनि और वायु प्रदूषण में कमी
- बंदरों को खाना खिलाने से होने वाली दुर्घटनाओं में गिरावट
- वन्य जीवों के जीन पूल में सुधार की संभावना
CO₂ में भारी कटौती, ईंधन की बचत
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 20 वर्षों में करीब 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा—जो लगभग 65 लाख पेड़ों के बराबर है। साथ ही 19% तक ईंधन की बचत भी संभव है।
देश के लिए ‘मॉडल हाईवे’
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे का यह एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर दिखाता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में देशभर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रेरणा बन सकता है।