देहरादून: चारधाम यात्रा-2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां अब और तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने स्पष्ट किया है कि यात्रा के दौरान किसी भी आपदा से निपटने के लिए उत्तराखंड को हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
NDMA के सदस्य कृष्णा एस वत्स ने देहरादून में आयोजित टेबल टॉप एक्सरसाइज की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्विघ्न बनाना केंद्र और राज्य दोनों की प्राथमिकता है।
यात्रियों को मिलेगा ‘इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्ट’
वत्स ने निर्देश दिए कि यात्रा मार्गों पर रूट-विशिष्ट जोखिम मॉनिटरिंग को और मजबूत किया जाए और यात्रियों तक समय पर इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्टिंग भेजी जाए, ताकि वे संभावित खतरों से पहले ही सतर्क हो सकें।
उन्होंने कहा कि सभी धामों की कैरिंग कैपेसिटी का ध्यान रखते हुए माइक्रो लेवल पर रिस्क असेसमेंट किया जाए और संवेदनशील स्थानों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान कर विशेष कार्ययोजना बनाई जाए।
रियल टाइम मॉनिटरिंग और हेल्थ सिस्टम मजबूत करने पर जोर
NDMA ने क्राउड और ट्रैफिक मैनेजमेंट को यात्रा की सफलता का अहम हिस्सा बताते हुए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को और सशक्त करने के निर्देश दिए। साथ ही मोबाइल हेल्थ यूनिट्स बढ़ाने और हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सख्ती बरतने को कहा गया, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
‘शून्य मृत्यु’ लक्ष्य के साथ तैयारी
NDMA के सचिव मनीष भारद्वाज ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन में उत्तराखंड ने एक बेंचमार्क स्थापित किया है। उन्होंने “जीरो कैजुअल्टी (शून्य मृत्यु)” के लक्ष्य के साथ सभी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने यात्रियों के मोबाइल में सचेत ऐप डाउनलोड कराने को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया, ताकि समय पर अलर्ट और चेतावनी संदेश मिल सकें।
AI और स्टार्टअप्स को मिलेगा मौका
वत्स ने आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों—खासतौर पर AI और ML—के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि इस क्षेत्र में नवाचार के लिए स्टार्टअप्स को अवसर दिया जाए। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में संचार बनाए रखने के लिए “कम्युनिकेशन ऑन व्हील्स” जैसी तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया।
मॉक ड्रिल से परखी गई तैयारियां
उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और NDMA के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस टेबल टॉप एक्सरसाइज में काल्पनिक आपदा परिदृश्यों के जरिए तैयारियों को परखा गया। इसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधन प्रबंधन और संचार व्यवस्था की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस तरह के मॉक अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।
लक्ष्य—सुरक्षित और निर्बाध यात्रा
सरकार और एजेंसियों का स्पष्ट लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध बनाया जाए। इसके लिए माइक्रो लेवल प्लानिंग, जोखिम की पूर्व पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
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