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अंकिता भंडारी हत्याकांड: क्या अब सामने आएगा वीआईपी का सच? उर्मिला सनावर के दावे पर उठे नए सवाल

 

 

 

पौड़ी : क्या अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब कोई बड़ा नाम बेनकाब होने वाला है? क्या वर्षों से जिस ‘वीआईपी’ को लेकर सवाल उठते रहे, उसका सच अब सामने आ रहा है? एक्ट्रेस उर्मिला सनावर के हालिया वीडियो ने इन्हीं सवालों को फिर हवा दे दी है। वीडियो में उर्मिला ने न सिर्फ एक कथित वीआईपी का नाम लेने का दावा किया है, बल्कि भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या ये दावे सिर्फ बयान हैं या इनके पीछे ठोस सबूत भी मौजूद हैं?

इस पूरे घटनाक्रम पर अंकिता भंडारी की मां सोनी देवी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर उर्मिला सनावर के पास इस मामले से जुड़े कोई भी पुख्ता सबूत हैं, तो उन्हें तुरंत अदालत के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा? क्या अब सच सामने लाने का यही सही समय नहीं है?

क्या सभी तथ्य अदालत तक पहुंचेंगे?

सोनी देवी का कहना है कि सच्चाई चाहे जितनी भी कड़वी हो, उसे सामने आना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी वीआईपी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका इस जघन्य अपराध में है, तो उसे कानून से क्यों बचाया जाए? उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी पर गलत और अनैतिक काम का दबाव बनाया गया, और जब उसने इनकार किया तो क्या उसकी हत्या कर दी गई? अगर ऐसा है, तो क्या यह सिर्फ एक हत्या है या सिस्टम पर एक गंभीर सवाल?

क्या उर्मिला की सुरक्षा भी खतरे में है?

अंकिता की मां ने एक और चिंता जाहिर की—क्या उर्मिला सनावर के साथ भी कोई अनहोनी हो सकती है? उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंकिता के पास रिसॉर्ट में चल रही संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी थी और उसने इन्हें उजागर करने की बात कही, तो क्या इसी वजह से उसकी जान ली गई? अगर आज उर्मिला भी ऐसे ही दावे कर रही हैं, तो क्या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए?

वीआईपी नाम पर बरसों से चुप्पी क्यों?

सोनी देवी का कहना है कि जिस वीआईपी नाम को लेकर सालों से सोशल मीडिया और जनचर्चा में सवाल उठते रहे, आज वही नाम खुले तौर पर सामने आने की बात कही जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार केवल नाम लिया जाएगा या सबूत भी सामने आएंगे? उन्होंने उर्मिला सनावर से अपील की है कि वह अपने पास मौजूद हर साक्ष्य अदालत में रखें, ताकि सच्चाई पूरी तरह उजागर हो सके।

अंत में सवाल यही है—

क्या अंकिता को अब इंसाफ मिलेगा?

क्या यह मामला सिर्फ एक परिवार का दर्द बनकर रह जाएगा या उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा एक निर्णायक मोड़ साबित होगा?

अब निगाहें अदालत, जांच एजेंसियों और उन दावों पर टिकी हैं, जिनसे सच सामने आने का दावा किया जा रहा है।

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