देहरादून: ठंड के मौसम में उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। वजह है अंकिता भंडारी हत्याकांड, जो एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। हाल ही में बीजेपी से निष्कासित नेता सुरेश राठौर से जुड़ी एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए लाइव वीडियो ने इस मामले को नई दिशा दे दी है। महिला ने वीडियो में कथित तौर पर एक “वीआईपी गट्टू” का उल्लेख करते हुए उसे भाजपा का प्रभावशाली नेता बताया है।
इस खुलासे के सामने आते ही कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को उत्तराखंड कांग्रेस ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर इस पूरे मामले को लेकर भाजपा और धामी सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता हत्याकांड की जांच शुरू से ही संदिग्ध रही है और सच्चाई को दबाने की कोशिशें की गईं।
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गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने रसूखदार लोगों को बचाने के लिए कदम उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद रिजॉर्ट पर की गई बुलडोजर कार्रवाई से भी कई अहम सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार, गठित SIT ने पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय गवाहों पर दबाव बनाया और सबूतों से छेड़छाड़ करने वालों पर कार्रवाई नहीं की।
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। देहरादून में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उत्तराखंड के आत्मसम्मान पर चोट है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन रिजॉर्ट पर कार्रवाई हुई, उसी दिन प्रदेश की अस्मिता को भी कुचल दिया गया।
हरीश रावत ने कहा कि अब कथित ‘वीआईपी’ को लेकर तस्वीर साफ होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अंकिता पर विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था और अब उसी दबाव के पीछे का नाम सामने आ रहा है। रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा जनता का ध्यान भटकाने के लिए अलग-अलग मुद्दे उछाल रही है, लेकिन कांग्रेस इस मामले में पीछे हटने वाली नहीं है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर नए आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ने के संकेत दे रहा है।

