एचआईवी पॉजिटिव महिला की पहचान सार्वजनिक करने पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया

 

 

 

 

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर स्थित डा. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में एचआईवी पॉजिटिव महिला मरीज की पहचान सार्वजनिक करने की घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कृत्य न केवल अमानवीय और असंवेदनशील है, बल्कि यह नैतिकता और मरीज की निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।

कोर्ट ने कहा कि किसी भी मरीज की स्वास्थ्य स्थिति या पहचान सार्वजनिक करना न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि यह उसकी गरिमा पर भी सीधा प्रहार है।

मामला तब सामने आया जब 10 अक्टूबर को मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि अस्पताल में नवजात शिशु के पास एक पोस्टर लगाया गया था, जिसमें यह लिखा था कि “बच्चे की मां एचआईवी पॉजिटिव है।”

यह पोस्टर प्रसूति वार्ड और नर्सरी वार्ड के बीच लगाया गया था। जब बच्चे का पिता वहां पहुंचा और यह नोटिस देखा तो भावुक होकर रो पड़ा

अदालत ने कहा कि इस तरह का आचरण “अत्यंत असंवेदनशील” है और इससे न केवल मां-बच्चे की पहचान उजागर हुई बल्कि उनके मानवीय अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ।

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे 15 अक्टूबर तक व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करें, जिसमें यह बताया जाए कि मरीजों की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।

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