देहरादून: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विषय पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। हाल ही में मनसा देवी, हरिद्वार में हुई भगदड़ की घटना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसे सभी धार्मिक स्थलों की पहचान कर अस्थायी और दीर्घकालिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा, जहां विशेष अवसरों पर भारी भीड़ उमड़ती है।
अतिक्रमण मुक्त रास्ते, तकनीक आधारित नियंत्रण
मुख्य सचिव ने कहा कि धार्मिक स्थलों तक जाने वाले मार्गों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए और मार्ग चौड़ीकरण का कार्य प्राथमिकता से हो। उन्होंने डिजिटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान लगाने और भीड़ नियंत्रण में इसका इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।
रूट प्लान और सर्कुलेशन रणनीति होगी तैयार
प्रत्येक धार्मिक स्थल के लिए रूट प्लान, सर्कुलेशन और निकासी योजना बनाई जाएगी। संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं को पूर्व निर्धारित स्टॉप पॉइंट्स पर रोका जाएगा। इस पूरी व्यवस्था के लिए भौतिक और तकनीकी उपायों को मजबूत किया जाएगा।
पहले चरण में 5 बड़े मंदिर होंगे शामिल
पहले चरण में मनसा देवी, चण्डी देवी, नीलकंठ, कैंचीधाम और पूर्णागिरि मंदिर को चिन्हित कर विशेषज्ञों की टीम द्वारा विश्लेषण कराया जाएगा। यह टीम सिविल इंजीनियरिंग और तकनीकी मानकों के आधार पर स्थल का निरीक्षण कर भीड़ नियंत्रण, बॉटलनेक क्षेत्रों की पहचान, रुकने के स्थान और SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, धीराज सिंह गरब्याल, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप और कुमायूं कमिश्नर दीपक रावत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार का यह कदम न केवल धार्मिक स्थलों की व्यवस्थित योजना और प्रबंधन सुनिश्चित करेगा, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को भी नई मजबूती देगा। तकनीक और प्रशासनिक समन्वय का यह मॉडल भविष्य में भीड़ प्रबंधन के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।

