एएनआई: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर कहा कि स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए वह पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत इस्तीफा सौंपते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद का आभार भी व्यक्त किया। धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन मानसून सत्र शुरू होते ही उनके इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया।
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राजनीतिक सफर और सार्वजनिक जीवन
राजस्थान के झुंझुनू में 18 मई 1951 को जन्मे जगदीप धनखड़ ने सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में शिक्षा प्राप्त की। एनडीए में चयनित होने के बावजूद वह शामिल नहीं हुए और राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और एलएलबी करने के बाद वकालत शुरू की। 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने के साथ ही वह झुंझुनू से सांसद रहे। 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया और 6 अगस्त 2022 को उन्होंने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी।
भारत में उपराष्ट्रपति का महत्व और चुनाव प्रक्रिया
भारत में उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। धनखड़ के इस्तीफे के बाद इस पद को भरने के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी। उपराष्ट्रपति के चुनाव में केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट करते हैं, जिनमें राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी शामिल होते हैं। उम्मीदवार के लिए भारत का नागरिक होना, न्यूनतम 35 वर्ष की आयु और 15,000 रुपये की जमानत राशि जमा करना अनिवार्य होता है। यदि 1/6 वोट नहीं मिलते हैं तो यह राशि जब्त हो जाती है।
धनखड़ ने जताया सभी का आभार
अपने इस्तीफे में धनखड़ ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सांसदों से मिले स्नेह, विश्वास और सहयोग उनके लिए अमूल्य रहेगा और उपराष्ट्रपति के रूप में मिले अनुभव लोकतंत्र में उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी हैं।

