पीटीआई: हिमाचल प्रदेश में लगातार बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और मूसलधार बारिश की घटनाओं ने हालात बिगाड़ दिए हैं। इन घटनाओं से राज्य में बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि, सड़कों और पुलों समेत बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ा है।
अमित शाह का केंद्रीय टीम गठन का निर्देश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिमाचल की स्थिति का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पुणे और IIT इंदौर के विशेषज्ञों की एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन का निर्देश दिया है। यह टीम मौके पर जाकर नुकसान का विश्लेषण करेगी और राहत एवं पुनर्निर्माण की दिशा में सुझाव देगी।
राज्य के ज्ञापन का इंतजार नहीं, तुरंत कार्रवाई
इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान आई आपदाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के ज्ञापन का इंतजार किए बिना ही एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) को हिमाचल भेज दिया है। यह टीम 18 से 21 जुलाई तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही है और सीधे मौके से रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को सौंपेगी ताकि राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके।
राहत और पुनर्निर्माण पर केंद्र की नजर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल में आपदा प्रबंधन और पुनर्निर्माण कार्यों में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। विशेषज्ञ टीम के आकलन के आधार पर केंद्र सरकार राज्य के लिए आवश्यक मदद और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी ताकि भविष्य में आपदा जोखिम को कम किया जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

