देहरादून: उत्तराखंड आज विकास के एक नए शिखर की ओर बढ़ रहा है। शुक्रवार को प्रदेश को 1342.84 करोड़ रुपये की 20 विकास योजनाओं का उपहार मिला, जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 1263.5 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं का शिलान्यास और 79.34 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं का लोकार्पण किया गया।
इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति ने राज्य के विकास अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की। लोकार्पित योजनाओं में पिथौरागढ़ कारागार, चम्पावत और टनकपुर के पॉलीटेक्निक भवन, और पुलिस विभाग के आवासीय भवन शामिल हैं।
शिलान्यास की गई परियोजनाओं में हल्द्वानी में बस टर्मिनल, वर्षाजल प्रबंधन और सड़क निर्माण, टनकपुर में पेयजल प्रणाली, ऊधमसिंहनगर में महिला छात्रावास, देहरादून में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, पीएसी के 108 आवास, कुमाऊं विश्वविद्यालय का आधुनिकीकरण, पार्किंग परिसर, पुलिस विभाग के आवासीय व अनावासीय भवन, और हरिद्वार व चम्पावत में अधोसंरचना विकास जैसे अनेक कार्य सम्मिलित हैं।
निवेश की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति:
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में हुए कुल 3.56 लाख करोड़ के एमओयू में से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ग्राउंडिंग हो चुकी है, जो राज्य की गंभीर इच्छाशक्ति और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाता है। विभिन्न क्षेत्रों में ग्राउंडिंग की स्थिति इस प्रकार है:
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ऊर्जा क्षेत्र: ₹1.03 लाख करोड़ के 157 एमओयू, ₹40,341 करोड़ की ग्राउंडिंग
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उद्योग क्षेत्र: ₹78,448 करोड़ के 658 एमओयू, ₹34,086 करोड़ की ग्राउंडिंग
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आवास क्षेत्र: ₹41,947 करोड़ के 125 एमओयू, ₹10,055 करोड़ की ग्राउंडिंग
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पर्यटन क्षेत्र: ₹47,646 करोड़ के 437 एमओयू, ₹8,635 करोड़ की ग्राउंडिंग
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उच्च शिक्षा: ₹6,675 करोड़ के 28 एमओयू, ₹5,116 करोड़ की ग्राउंडिंग
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अन्य क्षेत्र: ₹79,518 करोड़ के 374 एमओयू, ₹3,292 करोड़ की ग्राउंडिंग
इन निवेश प्रस्तावों से राज्य में 75,327 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री का संकल्प:
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “उत्तराखंड अब विकास और निवेश की दृष्टि से भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। हम हर निवेश को रोजगार, तकनीकी विकास और जनसामान्य की समृद्धि से जोड़ रहे हैं।”
यह आयोजन सिर्फ योजनाओं का शिलान्यास नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण की नींव है। निवेश, नवाचार और अवसंरचना में हो रही तेज़ी से साफ है – अब उत्तराखंड सिर्फ देवभूमि नहीं, बल्कि निवेशभूमि बन चुका है।