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उत्तराखंड की जेलों में बनेंगे हाईटेक साउंडप्रूफ कक्ष, ऑनलाइन सुनवाई होगी और भी सुगम

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड की जेलों में ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में गृह विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य की प्रमुख जेलों में कैदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए साउंडप्रूफ कक्ष बनाए जाएंगे, ताकि एक ही दिन में होने वाली कई सुनवाइयों में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो।

प्रदेश की 13 जेलों में फिलहाल 5500 से अधिक कैदी बंद हैं, जिनमें बड़ी संख्या उन बंदियों की है जिनके मुकदमे अभी विचाराधीन हैं। कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था शुरू हुई थी, जिसने जेल प्रशासन को कैदियों को बार-बार कोर्ट ले जाने से निजात दिलाई और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी काफी हद तक समाप्त किया।

हालांकि, एक ही तारीख को कई सुनवाइयों के चलते तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही थीं, क्योंकि अधिकांश जेलों में सिर्फ एक कमरा इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध था। अब इस समस्या के समाधान के लिए देहरादून, हरिद्वार और सितारगंज जैसी प्रमुख जेलों में 6 से 7 साउंडप्रूफ कक्ष बनाए जा रहे हैं, जिनकी संख्या चरणबद्ध रूप से अन्य जेलों में भी बढ़ाई जाएगी।

हर जेल में इस कार्य पर लगभग 70 लाख रुपये का खर्च प्रस्तावित है। गृह विभाग ने इसके लिए प्रारंभिक बजट भी जारी कर दिया है, और नीति आयोग से भी जेलों के उच्चीकरण के लिए आर्थिक सहायता मांगी गई है।

गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि यह पहल न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कैदियों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा, “सुनवाई व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करना आज की आवश्यकता है, जिससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि न्याय की गति भी तेज़ होगी।”

उत्तराखंड की जेलों में यह तकनीकी उन्नयन एक सकारात्मक बदलाव की ओर संकेत करता है, जो देश की अन्य जेल व्यवस्थाओं के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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