देहरादून में असहाय बेटियों की नई उम्मीद बना “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा”, शिक्षा के सपनों को मिल रही उड़ान

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड सरकार की “सशक्त बेटी, समृद्ध उत्तराखंड” की परिकल्पना अब ज़मीन पर उतर चुकी है—वो भी बेहद भावनात्मक और प्रभावशाली रूप में। देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट “नंदा-सुनंदा” असहाय और जरूरतमंद बालिकाओं के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता की नई किरण बनकर उभरा है।

आज जिला कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी सविन बंसल ने 5 असहाय बालिकाओं को ₹1,65,800 के चेक वितरित किए। ये सहयोग उन बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए किया गया है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ाई का सपना देख रही हैं।

अब तक इस परियोजना के अंतर्गत 38 बालिकाओं को ₹14 लाख से अधिक की सहायता मिल चुकी है। इस योजना का मूल उद्देश्य है — निर्धन, संकटग्रस्त और असहाय बालिकाओं को शिक्षा का अवसर देना और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाना।

कार्यक्रम में एक बालिका की भावुक प्रतिक्रिया ने सभी की आंखें नम कर दीं:

“थैंक्यू डीएम सर, जैसे आपने हमारी शिक्षा में मदद की, हम भी आगे चलकर किसी जरूरतमंद की सहायता करने का प्रयास करेंगे।”

प्रशासन की संवेदनशील पहल, बेटियों की प्रेरणा बनी

इस अवसर पर डीएम सविन बंसल ने अपनी टीम की सराहना करते हुए कहा कि “बहुत कम समय में सभी औपचारिकताओं को पूरा कर बालिकाओं तक सहायता पहुंचाना एक प्रेरणादायी कार्य है।” उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे पढ़ाई को अपना मुख्य लक्ष्य बनाएं और हर परिस्थिति में शिक्षा को प्राथमिकता दें।

“नंदा-सुनंदा” — आर्थिक सहायता से आगे, आत्मविश्वास की नींव

यह परियोजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि यह बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर एक संवेदनशील और दूरदर्शी सामाजिक पहल बन चुकी है। “नंदा-सुनंदा” जैसी पहलें बताती हैं कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मानवीय संवेदना मिलती हैं, तो बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते — वे किसी की ज़िंदगी का सबसे सुनहरा अध्याय बन जाते हैं। देहरादून प्रशासन ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे नेक हों, तो हर बेटी के सपनों को पंख दिए जा सकते हैं।

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