उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक: आरक्षण में अनियमितता बनी वजह, अधिसूचना रद्द
The Mountain People
नैनीताल: उत्तराखंड में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को बड़ा झटका लगा है। नैनीताल हाईकोर्ट ने आरक्षण प्रक्रिया में अनियमितता को आधार बनाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को जारी की गई अधिसूचना अब प्रभावहीन हो गई है।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनावों के लिए लागू की गई नई आरक्षण नियमावली नियमानुसार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण रोटेशन की पारदर्शिता के बिना चुनाव कराना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
याचिकाकर्ता गणेश दत्त कांडपाल सहित अन्य ने दलील दी कि लगातार आरक्षित सीटों को चौथी बार फिर से आरक्षित करना सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों के चुनावी अधिकारों पर कुठाराघात है। कोर्ट ने पाया कि सरकार संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रही, फिर भी आयोग ने जल्दबाजी में अधिसूचना जारी कर दी।
अब कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार को नियमबद्ध और निष्पक्ष आरक्षण नीति के तहत नई अधिसूचना जारी करनी होगी। साथ ही यह आदेश उन सैकड़ों संभावित प्रत्याशियों के लिए भी राहत है, जो आरक्षण व्यवस्था में असमानता को लेकर चिंतित थे। यह मामला न सिर्फ राज्य की चुनावी पारदर्शिता, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक अहम उदाहरण बनकर उभरा है।