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कांवड़ मेला 2025 की तैयारी को मिली रफ्तार: मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश, डीजे बैन और सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस

 

 

 

देहरादून: 11 जुलाई से शुरू हो रहे कांवड़ मेला 2025 के सुचारू संचालन को लेकर उत्तराखंड सरकार ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मेले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की गई और संबंधित विभागों व एजेंसियों को समयबद्ध, समन्वित और कड़े दिशा-निर्देश दिए गए।

शुद्ध श्रद्धा, सुनियोजित व्यवस्था

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस बार का कांवड़ मेला पूरी तरह व्यवस्थित, सुरक्षित और शांतिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, खानपान की गुणवत्ता और भीड़ प्रबंधन जैसे हर पहलू पर जिम्मेदारी से कार्य करने को कहा।

नियमों की अवहेलना नहीं होगी सहन

  • नशे की हालत में उत्पात मचाने वालों, उग्र व्यवहार करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई होगी।

  • बड़े डीजे साउंड के प्रयोग पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध।

  • किसी भी तरह की लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं पर होगी सख्त कार्रवाई।

हरिद्वार में विशेष प्रबंधन, रूट प्लान तैयार

हरिद्वार, जो मेला संचालन का मुख्य केंद्र है, वहां के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से यातायात, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था और रूट डाइवर्जन की विस्तृत जानकारी दी।

  • मेला क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 37 जोन और 134 सेक्टर में बाँटा गया है।

  • स्थायी व अस्थायी निर्माण कार्यों की जरूरत और उसके बजटीय प्रावधान भी साझा किए गए।

तीन जिलों ने रखी अपनी तैयारियों की रूपरेखा

देहरादून, पौड़ी और टिहरी जिलों के अधिकारियों ने अपने क्षेत्रों में कांवड़ मेला प्रबंधन और बजटीय जरूरतों से मुख्य सचिव को अवगत कराया।

श्रावण मास की प्रमुख तिथियां:

  • कांवड़ मेला अवधि: 11 जुलाई से 23 जुलाई

  • पंचक अवधि: 13 से 17 जुलाई

  • डाक कांवड़: 20 से 23 जुलाई

  • श्रावण शिवरात्रि व जलाभिषेक: 23 जुलाई

बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद:

अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन, गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे, आईजी के.एस. नगन्याल, साथ ही हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, टिहरी के जिलाधिकारी व एसएसपी सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

मुख्य सचिव के नेतृत्व में चल रही तैयारियों से यह साफ है कि सरकार इस बार कांवड़ मेले को एक आदर्श आयोजन के रूप में प्रस्तुत करने के लिए संकल्पबद्ध है। नियमों का पालन, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा तीनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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