देहरादून: राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री घोषणाओं को शीर्ष प्राथमिकता पर लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जनहित और राज्यहित की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ज़मीनी हकीकत में बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री की घोषणाएं जनता की अपेक्षाओं का प्रतिबिंब होती हैं, इसलिए उनकी समयबद्ध पूर्ति हमारी जिम्मेदारी है।”
प्रमुख निर्देश:
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घोषणाओं को पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
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विभागों को पोर्टल पर अपनी अद्यतन स्थिति स्वतः देखने और संशोधित करने की सुविधा प्रदान की जाए।
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मुख्यमंत्री घोषणा सेल को सभी अद्यतन सूचनाएं समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
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टीएसी (तकनीकी स्वीकृति समिति) और ईएफसी (व्यय वित्त समिति) से संबंधित प्रस्तावों को एक माह के भीतर निस्तारित किया जाए।
बैठक के दौरान शहरी विकास, लोक निर्माण, शिक्षा और सिंचाई विभाग की योजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इन विभागों द्वारा अब तक की गई प्रगति पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही गति और पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उपस्थित अधिकारी:
बैठक में सचिव नितेश कुमार झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, एस.एन. पाण्डेय, महानिदेशक शिक्षा श्री अभिषेक रोहेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव का यह सख्त रुख दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार मुख्यमंत्री घोषणाओं को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनविश्वास का वादा मानती है। अब देखना यह होगा कि विभाग इन निर्देशों का पालन कितनी कुशलता और तत्परता से करते हैं।

