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भारतीय रक्षा तंत्र में नई ऊर्जा: वायुसेना और सेना को मिले तीन नए सेनापति, रणनीतिक मोर्चों पर होंगे प्रभावशाली बदलाव

 

 

 

पीटीआई:  भारत के रक्षा प्रतिष्ठान में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब वायुसेना और थलसेना में तीन शीर्ष स्तर के बदलाव हुए। ये बदलाव सिर्फ पदों की अदला-बदली नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच और सैन्य नेतृत्व की नई दिशा की शुरुआत माने जा रहे हैं।

एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने बेंगलुरु स्थित वायुसेना प्रशिक्षण कमान (Training Command) की बागडोर संभाली। उन्हें इस मौके पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। तेजिंदर सिंह एक अनुभवी फाइटर पायलट हैं जिन्हें 4,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वे कई अहम मोर्चों की कमान संभाल चुके हैं, जिसमें एक फाइटर स्क्वाड्रन, रडार स्टेशन और जम्मू-कश्मीर का एयर बेस शामिल है।

वहीं नई दिल्ली में एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख (CISC) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। दीक्षित 3,300 घंटे से अधिक उड़ान के अनुभव के साथ 20 से अधिक प्रकार के विमानों में दक्ष हैं। उन्होंने टेस्ट पायलट, ट्रेनिंग बेस कमांडर, और मध्य वायु कमान के प्रमुख जैसे अहम पदों पर काम किया है। उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक, वायुसेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक जैसे सैन्य सम्मान मिल चुके हैं।

उधर उधमपुर में लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने उत्तरी सेना कमान के कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया। वह ले. जनरल एमवी सुचंद्र कुमार के उत्तराधिकारी बने हैं, जो 30 वर्षों की शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। प्रतीक शर्मा ऑपरेशन पवन, मेघदूत, रक्षक और पराक्रम जैसे अभियानों का हिस्सा रहे हैं और सैन्य संचालन तथा सूचना युद्ध के महानिदेशक जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं।

इन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से स्पष्ट है कि भारतीय रक्षा बल तकनीकी दक्षता, रणनीतिक सोच और अनुभव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। यह बदलाव आने वाले समय में भारत की सामरिक मजबूती और सैन्य आधुनिकता को और धार देंगे।

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