देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने 20 फरवरी को प्रदेश का आम बजट पेश किया, जिसमें खेल, शिक्षा, रोजगार और पलायन रोकथाम को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बजट में विशेष रूप से खिलाड़ियों, उद्यमियों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अहम प्रावधान किए गए हैं।
बजट के प्रमुख आकर्षण:
खेल और युवा विकास पर जोर:
- उदीयमान खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति – ₹10 करोड़
- खेल महाकुंभ आयोजन – ₹15 करोड़
- राज्य और राष्ट्रीय युवा महोत्सव – ₹5 करोड़
- मुख्यमंत्री ग्रामीण खेलकूद एवं स्वास्थ्य संवर्धन योजना – ₹2.50 करोड़
रोजगार और स्वरोजगार के लिए बड़ी घोषणाएं:
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना – ₹60 करोड़
- मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना – ₹10 करोड़
- रूरल बिजनेस इनक्यूबेटर (RBI) योजना – ₹20 करोड़
- प. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना – ₹21.60 करोड़
- उद्यमिता, कौशल और नवाचार को बढ़ावा – ₹7.11 करोड़
शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सहयोग:
- मुख्यमंत्री शेवनिंग उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति – ₹2 करोड़
- एनडीए और आईएमए में चयनित छात्रों को प्रोत्साहन राशि – ₹1.25 करोड़
- टाटा टेक्नोलॉजी मॉडल के अनुसार आईटीआई का उन्नयन
- राजस्व मद: ₹45 करोड़
- पूंजीगत मद: ₹18 करोड़
बजट में युवाओं और खिलाड़ियों को क्यों मिली प्राथमिकता?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बजट को उत्तराखंड के युवा और खेल प्रतिभाओं के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया। राज्य में खेल संस्कृति को विकसित करने, ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए कई नई योजनाएं पेश की गई हैं।
क्या बदलेगा इस बजट से?
1.खेलों में नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा
2.ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे पलायन रुकेगा
3. छात्रों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे
4.उत्तराखंड को स्टार्टअप और उद्यमिता के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा
इस बजट में खेल, शिक्षा और रोजगार को मजबूती देने की पूरी कोशिश की गई है। यह बजट उत्तराखंड को खेल और उद्यमिता के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती है।