देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के आसन बैराज से निकलने वाली नहरों पर बने पुराने पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को अहम सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने मामले को गंभीर और संवेदनशील मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव और लोक निर्माण विभाग के सचिव को 8 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता रघुनाथ सिंह नेगी ने अपनी याचिका में बताया कि 1965 में बने इन पुलों की भार क्षमता अब समाप्त हो चुकी है। खनन और भारी वाहनों की आवाजाही ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। उनका कहना है कि इन पुलों पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, इसलिए इन पर भारी वाहनों को प्रतिबंधित किया जाए और पुलों की मरम्मत कराई जाए।
सरकार और याचिकाकर्ता आमने-सामने
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि भारी वाहनों की आवाजाही पर पहले से ही रोक लगी हुई है, लेकिन वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण यह प्रतिबंध भारी वाहन स्वामियों को नुकसान पहुंचा रहा है। सरकार का कहना है कि रोक हटाने पर विचार किया जाना चाहिए।
वहीं, याचिकाकर्ता ने वैकल्पिक मार्ग का सुझाव देते हुए कहा कि सरकार के पास 15-16 किलोमीटर दूर से भारी वाहनों को डायवर्ट करने का विकल्प है, लेकिन फ्यूल बचाने के लिए वाहन चालक इस मार्ग का उपयोग नहीं करते।
कोर्ट ने जताई सख्ती
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि पुलों की मरम्मत और नए पुलों के निर्माण को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई तक सभी पक्षों को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
क्या आसन बैराज के जर्जर पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहेगी या सरकार नए समाधान लेकर आएगी? इस पर कल की सुनवाई में तस्वीर साफ होगी।